सरकार को चुना लगाने की कोशिश कर रहा है बैतूल का आबकारी विभाग बड़े ठेकेदारों के दबाव में छोटे लाइसेंसियों को हतोत्साहित करने की साजिश ?
By,वामन पोटे
सरकार को चुना लगाने की कोशिश कर रहा है बैतूल का आबकारी विभाग
बड़े ठेकेदारों के दबाव में छोटे लाइसेंसियों को हतोत्साहित करने की साजिश ?
बैतूल 4 मार्च।। जिले की 61 शराब दुकानों को वर्ष 2026-27 के लिए 15 समूहों में बांटकर ई-टेंडर और ई-टेंडर कम ऑक्शन प्रक्रिया शुरू की गई है। पहले चरण के पहले बैच में शामिल पांच समूहों—प्रतापवार्ड, रायआमला, सारणी, बैतूल बाजार और भैंसदेही—के लिए सोमवार को दोपहर 2:05 बजे ई-टेंडर खोले गए, लेकिन किसी भी समूह के लिए एक भी सीधा टेंडर प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद शुरू हुई ई-टेंडर कम ऑक्शन प्रक्रिया में केवल दो समूहों में बोली आई, जबकि तीन समूह पूरी तरह खाली रहे। इस पूरे घटनाक्रम ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और बड़े ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो समूहों में हुई बोली, तीन में सन्नाटा
पहले बैच में कुल 117 करोड़ रुपए की अपसेट प्राइस वाले पांच समूहों की नीलामी प्रस्तावित थी। ई-टेंडर में एक भी ऑफर नहीं आया, जबकि ई-ऑक्शन में प्रतापवार्ड और रायआमला समूह के लिए चार बिड प्राप्त हुईं। दोपहर 3:30 बजे से शुरू हुई ऑक्शन प्रक्रिया में 15-15 मिनट के अंतराल पर बोली लगाने का प्रावधान था।
जिले का सबसे बड़ा समूह प्रतापवार्ड ग्रुप स्मोकिन लिकर को मिला। इस समूह की ऑफसेट प्राइस 42 करोड़ 88 लाख 82 हजार 410 रुपए थी। इस ग्रुप में प्रतापवार्ड, बैतूल सदर, टिकारी, बडोरा और बैतूल शहर की पांच दुकानें शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार स्मोकिन लिकर सोम ग्रुप से संबंधित कंपनी है, जिससे जिले में एक बार फिर बड़े समूह की एंट्री मानी जा रही है।
वहीं रायआमला समूह की नीलामी देर रात तक चली और यह समूह कुलभूषण यादव को मिला। इस ग्रुप में रायआमला, नरखेड़, प्रभातपट्टन, बिरूल बाजार और छोटी अमरावती की दुकानें शामिल हैं। इसकी ऑफसेट प्राइस 19 करोड़ 56 लाख 41 हजार 051 रुपए थी। देर रात तक चली बोली में यह समूह 21 करोड़ 49 लाख में कुल भूषण यादव ने हासिल किया है। यह समूह अपसेट प्राइस से अधिक में गया है।
घाटे का प्रचार, मुनाफे के आंकड़े कुछ और
बड़े ठेकेदारों द्वारा पूरे वर्ष 2025-26 में घाटे का प्रचार किया जाता रहा। दावा किया गया कि शराब व्यवसाय में भारी नुकसान हो रहा है। लेकिन विभागीय सूत्रों और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 तक प्रत्येक समूह को 5 से 25 करोड़ रुपए तक का मुनाफा हुआ है। ऐसे में घाटे की बात कई लोगों को रणनीतिक प्रचार लग रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घाटे की बात फैलाकर छोटे और नए लाइसेंसियों को हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे टेंडर प्रक्रिया से दूर रहें। यदि पर्याप्त टेंडर नहीं आए तो शासन को पुनः बड़े समूह बनाकर नीलामी करनी पड़ सकती है, जिससे पुराने बड़े ठेकेदारों का एकाधिकार कायम रह सके।
गांव-गांव बिक्री, फिर भी घाटे का दावा
जिले में निर्धारित दुकानों के अतिरिक्त गांव-गांव और गली-गली अंग्रेजी शराब की बिक्री के आरोप भी सामने आते रहे हैं। आदिवासी क्षेत्रों में अतिरिक्त बिक्री केंद्र संचालित किए जाने की चर्चाएं भी रही हैं। इसके बावजूद घाटे का प्रचार सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिक्री निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक हुई, तो नुकसान का दावा कैसे सही ठहराया जा सकता है?
आरोप यह भी हैं कि जिला प्रशासन और प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण के चलते बड़े ठेकेदारों को खुली छूट मिली रही। ऐसे में यदि विभाग घाटे की कहानी को आगे बढ़ाता है तो यह सरकार के राजस्व को प्रभावित करने वाली रणनीति मानी जा सकती है।
तीन समूहों में टेंडर नहीं
सारणी, भैंसदेही और बैतूल बाजार समूहों में एक भी ऑफर नहीं आया। इससे इन क्षेत्रों की नीलामी फिलहाल टल गई है। यह स्थिति भी इस आशंका को बल देती है कि बाजार में जानबूझकर अनिश्चितता का माहौल बनाया गया है।
आज से दूसरे बैच की प्रक्रिया
पहले चरण के दूसरे बैच की टेंडर प्रक्रिया आज से शुरू हो रही है। इसमें भी जिले के पांच समूह शामिल किए जाएंगे, जिनका चयन रेंडम तरीके से किया जाएगा। 5 मार्च दोपहर 2 बजे तक ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के लिए ऑनलाइन ऑफर जमा किए जा सकेंगे। उसी दिन दोपहर 2:05 बजे टेंडर खोले जाएंगे और 3:30 बजे से ऑक्शन प्रक्रिया शुरू होगी।
सरकार को नुकसान पहुंचाने की साजिश?
पूरे घटनाक्रम से यह सवाल उठ रहा है कि क्या बड़े ठेकेदारों और विभागीय मिलीभगत के जरिए टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है? यदि छोटे समूहों में प्रतिस्पर्धा नहीं बढ़ी तो सरकार को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल पाएगा।
छोटे लाइसेंसियों को मौका देने की नई व्यवस्था से एकाधिकार खत्म होने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि बड़े समूहों का दबदबा बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि शासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या वाकई पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी नीलामी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा
Comments are closed.