18 साल बाद पारदी दंपती हत्याकांड में फैसला: पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार सहित 14 आरोपी बरी
By ,वामन पोटे
18 साल बाद पारदी दंपती हत्याकांड में फैसला: पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार सहित 14 आरोपी बरी
बैतूल 13 मार्च।। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बहुचर्चित पारदी दंपती हत्याकांड में करीब 18 साल बाद फैसला सुनाते हुए भोपाल स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री और विधायक सुखदेव पांसे तथा जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार सहित 14 आरोपियों को बरी कर दिया। लंबे समय से चल रही इस सुनवाई का फैसला शुक्रवार को सुनाया गया, जिसके बाद आरोपियों और उनके समर्थकों में राहत की भावना देखी गई।
यह मामला वर्ष 2008 में बैतूल जिले के मुलताई के पास स्थित चौथिया गांव में सामने आया था। उस समय पारदी समुदाय के डेरे में हिंसा और आगजनी की घटना हुई थी। घटना के बाद बोंद्रु पारदी और उनकी पत्नी के शव गांव के एक कुएं से बरामद किए गए थे। इस घटना ने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे, वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार सहित कुल 16 ग्रामीणों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया था। बाद में इस मामले की जांच और सुनवाई भोपाल स्थित सीबीआई कोर्ट में चली, जहां पिछले करीब 18 वर्षों से यह मामला विचाराधीन रहा।
लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामले में कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न पहलुओं की जांच की गई। हालांकि इस दौरान दो आरोपियों की मृत्यु भी हो गई, जिसके कारण अंतिम निर्णय के समय कुल 14 आरोपियों पर ही फैसला सुनाया गया।
शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के इस फैसले के साथ ही लगभग दो दशकों से चल रहा यह बहुचर्चित मामला समाप्त हो गया।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता वी.के. सक्सेना और संजय रावत ने अदालत में पैरवी की। फैसले के बाद उन्होंने कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया है। वहीं आरोपियों के समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताते हुए खुशी जाहिर की।
इस मामले को लेकर बैतूल जिले में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा बनी हुई थी। फैसले के बाद एक ओर जहां आरोपियों और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है, वहीं इस प्रकरण से जुड़े कई लोग पूरे मामले को लेकर वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया को भी याद कर रहे हैं।
करीब 18 साल बाद आए इस फैसले ने जिले के एक पुराने और चर्चित मामले का कानूनी अध्याय समाप्त कर दिया है।
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