दिल्ली में यूएनआई दफ्तर सील, हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई; कर्मचारियों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का लगाया आरोप
By,वामन पोटे
दिल्ली में यूएनआई दफ्तर सील, हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई; कर्मचारियों ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का लगाया आरोप

नई दिल्ली, 21 मार्च ।। राजधानी नई दिल्ली में स्थित यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के रफी मार्ग स्थित कार्यालय को शुक्रवार को पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में सील कर दिया गया। यह कार्रवाई दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद की गई, जिसमें एजेंसी को आवंटित भूमि के निरस्तीकरण को बरकरार रखा गया था। इस दौरान कार्यालय में मौजूद पत्रकारों और कर्मचारियों को बाहर निकाला गया, जिस पर कर्मचारियों ने पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के साथ मिलकर शाम के समय यूएनआई कार्यालय परिसर में प्रवेश किया और वहां मौजूद कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से परिसर खाली करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई।
पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) सचिन शर्मा ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एलएंडडीओ के अधिकारियों को परिसर का कब्जा दिलाने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों को शांतिपूर्वक परिसर खाली करने के लिए कहा गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है। उन्होंने कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार की बदसलूकी के आरोपों से इनकार किया।
वहीं दूसरी ओर, यूएनआई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना पूर्व सूचना दिए अचानक कार्यालय खाली करने को कहा गया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन से संपर्क करने या अपने निजी सामान को समेटने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कई पत्रकारों और कर्मचारियों, जिनमें महिला कर्मचारी भी शामिल थीं, को जबरन उनकी सीटों से उठाकर बाहर कर दिया।

यूएनआई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि कर्मचारियों ने कुछ समय की मांग की थी ताकि प्रबंधन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंच सकें और स्थिति स्पष्ट कर सकें, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि कर्मचारियों के साथ मौखिक दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें धमकाया गया कि यदि वे स्वयं नहीं निकलेंगे तो बल प्रयोग किया जाएगा।
यह पूरा मामला केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय द्वारा जारी आदेश से जुड़ा हुआ है। इस आदेश में यूएनआई को रफी मार्ग स्थित आवंटित भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यूएनआई को वर्ष 1979 में आवंटित इस भूमि पर निर्धारित समयसीमा के भीतर भवन निर्माण करना था, लेकिन चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एजेंसी द्वारा कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया। अदालत ने इसे “मूल्यवान सार्वजनिक भूमि पर प्रभावी अतिक्रमण” करार दिया।
अदालत ने 29 मार्च 2023 को एलएंडडीओ द्वारा जारी निरस्तीकरण आदेश को वैध ठहराते हुए कहा कि इसमें किसी प्रकार की अवैधता नहीं पाई गई है। यूएनआई ने इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।
अदालत के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि यह भूमि मूल रूप से यूएनआई के साथ-साथ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन के संयुक्त उपयोग के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन प्राथमिक आवंटित संस्था अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रही।
कार्रवाई के बाद परिसर के मुख्य द्वार पर एक आधिकारिक नोटिस चस्पा किया गया है, जिसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय के 20 मार्च के आदेश के अनुपालन में भारत सरकार ने परिसर को अपने कब्जे में ले लिया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि एलएंडडीओ की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति द्वारा परिसर में प्रवेश या उपयोग करना प्रतिबंधित है और उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत में भी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। मामले को लेकर आगे कानूनी और प्रशासनिक स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
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