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बैतूल जिले में विवादित जमीनों का खेल: सस्ते दामों में खरीदी, सीमांकन के दौरान हिंसा में नेता और पुलिसकर्मी घायल

By,वामन पोटे

बैतूल जिले में विवादित जमीनों का खेल: सस्ते दामों में खरीदी, सीमांकन के दौरान हिंसा में नेता और पुलिसकर्मी घायल
बैतूल, 26 मार्च ।। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त और सीमांकन को लेकर बढ़ते विवाद ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। मुलताई थाना क्षेत्र के ग्राम खेड़ी रामोसी में जमीन सीमांकन के दौरान हुए टकराव में पत्थरबाजी और मारपीट की घटना सामने आई है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष भास्कर मगरदे और मासोद चौकी प्रभारी उप निरीक्षक रणधीर सिंह राजपूत गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में 22 नामजद और 10 अज्ञात आरोपियों सहित कुल 32 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर राजस्व विभाग की टीम तहसीलदार और पुलिस बल के साथ जेसीबी मशीन लेकर सीमांकन के लिए मौके पर पहुंची थी। इस दौरान स्थानीय आदिवासी परिवारों ने सीमांकन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। प्रारंभिक विरोध धीरे-धीरे उग्र हो गया और देखते ही देखते स्थिति हिंसक टकराव में बदल गई। आरोप है कि विरोध कर रहे लोगों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और प्रशासनिक टीम को पीछे हटना पड़ा।
बुधवार को सामने आए एक वीडियो में भास्कर मगरदे को गिराकर उनके साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। वहीं उन्हें बचाने पहुंचे चौकी प्रभारी रणधीर सिंह राजपूत को भी भीड़ ने घेर लिया और उनके साथ भी मारपीट की गई। हमले में दोनों के सिर और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना पहुंचे थे, जिसके कारण उन्हें अधिक नुकसान उठाना पड़ा।
घटना के समय मुलताई थाना से करीब आठ पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन अचानक हुए हमले के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हालात को काबू में किया गया। घायलों को पहले महाराष्ट्र के वरुड ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बैतूल जिला अस्पताल रेफर किया गया। दोनों का उपचार जारी है और स्थिति पर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।
घटना के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चौकी प्रभारी रणधीर सिंह राजपूत को लाइन अटैच कर रक्षित केंद्र बैतूल भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में उन पर स्थिति का सही आकलन न करने और पर्याप्त बल के बिना मौके पर पहुंचने का आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
इधर, इस मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने जमीन को लेकर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। आरोपी रामजी उइके और उनके परिवार का कहना है कि उनके पास करीब 37 एकड़ 70 डिसमिल जमीन थी, जिसे उन्होंने एक हरिजन परिवार को बटाई पर दी थी। आरोप है कि उक्त परिवार ने धोखाधड़ी कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली और बाद में उसे संतोष नामक व्यक्ति को बेच दिया। आगे चलकर यह जमीन भास्कर मगरदे को विक्रय कर दी गई।
आदिवासी पक्ष का कहना है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और बिना वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए सीमांकन की कार्रवाई की जा रही थी। उनका दावा है कि पहले जमीन का निष्पक्ष सीमांकन किया जाए और सही माप के बाद ही वे कब्जा देने को तैयार होंगे। इस विवाद ने क्षेत्र में जमीन के पुराने लेन-देन और कथित रूप से सस्ते दामों में विवादित भूमि खरीदने की प्रवृत्ति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि जिले में कई विवादित जमीनें कम कीमत पर खरीदी-बेची जा रही हैं, जिनमें कुछ प्रभावशाली लोग और कालोनाइजर भी शामिल बताए जाते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, कब्जे और वास्तविक मालिकाना हक को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहते हैं, जो बाद में कानून-व्यवस्था की समस्या बन जाते हैं।
मुलताई थाना प्रभारी नरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि मामला संवेदनशील है और सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रशासन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में बताया है।
प्रशासन का कहना है कि भूमि विवाद के इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम रखी जा सके।

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