मध्य प्रदेश में शत्रु संपत्तियों पर प्रशासनिक शिकंजा: बैतूल समेत कई जिलों में रिकॉर्ड की गहन छानबीन शुरू
By,वामन पोटे
मध्य प्रदेश में शत्रु संपत्तियों पर प्रशासनिक शिकंजा: बैतूल समेत कई जिलों में रिकॉर्ड की गहन छानबीन शुरू
बैतूल ( बैतूलवार्ता ):
देश और मध्य प्रदेश में शत्रु संपत्तियों की पहचान और उनके विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद राज्य शासन ने प्रशासनिक कसावट लाते हुए इस दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। इसी क्रम में मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैतूल, भोपाल, जबलपुर, सिवनी, सतना, कटनी, सीहोर, रतलाम और डिंडोरी जिलों के कलेक्टरों को विशेष और सख्त निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य देश में स्थित ऐसी समस्त संपत्तियों का सटीक स्थान और उनकी वास्तविक स्थिति का ब्योरा जुटाकर उन पर कानूनी रूप से नियंत्रण स्थापित करना है। दशकों पुरानी इन संपत्तियों पर हो रहे अवैध कब्जों और फर्जी बिक्री के मामलों पर विराम लगाने के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत पुराने राजस्व रिकॉर्ड, खसरों और वर्ष 1974 के उच्च न्यायालय के फैसलों का मिलान किया जा रहा है, जिससे यह साफ हो सके कि कौन सी संपत्ति वैध वारिसों के पास है और कौन सी सरकार के अधीन आने वाली शत्रु संपत्ति है।
क्या होती है शत्रु संपत्ति?
शत्रु संपत्ति वह अचल संपत्ति होती है, जिसे उन व्यक्तियों ने छोड़ दिया है जो भारत की नागरिकता छोड़कर पाकिस्तान या चीन जैसे शत्रु देशों में जा बसे। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने ‘शत्रु संपत्ति अधिनियम’ के तहत ऐसी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था। इन सभी संपत्तियों का केंद्रीय स्तर पर प्रबंधन और संरक्षण भारत सरकार के ‘शत्रु संपत्ति अभिरक्षक विभाग (कस्टोडियन ऑफ एनेमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया), मुंबई’ द्वारा किया जाता है।
जिलों में रिकॉर्ड की छानबीन और जमीनों का खेल
निर्देश मिलने के बाद बैतूल जिला प्रशासन ने भूमि रिकॉर्ड की गहन छानबीन शुरू कर दी है। शुरुआती प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, जिले में कई ऐसी संपत्तियां हैं जो या तो वैध वारिसों के नाम पर दर्ज हैं या फिर 1974 से पहले कानूनी रूप से बेची जा चुकी हैं। वहीं दूसरी ओर, राजधानी भोपाल की बहुचर्चित नवाबी संपत्तियां इस पूरी प्रक्रिया में सबसे संवेदनशील मानी जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैतूल शहर के गौठाना से हमलापुर तक और जिला मुख्यालय से सटे ग्राम जामठी में ऐसी संपत्तियों के होने की जानकारी सामने आई है, जिनके स्वामित्व और नामांतरण की जांच अब अनिवार्य हो गई है। आरोप है कि वर्षों पहले देश छोड़कर पाकिस्तान जाने वाले लोगों की खाली छूटी जमीनों को कुछ लोगों ने कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड में अपने नाम दर्ज करा लिया और फिर उनका व्यावसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया। कहीं इन जमीनों पर मैरिज गार्डन विकसित किए गए, तो कहीं कॉलोनियों के लिए प्लॉट काटकर बेच दिए गए। हालांकि, इन अनियमितताओं की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
खरीदारों पर भी मंडरा सकता है संकट
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उन आम नागरिकों से जुड़ा है, जिन्होंने इन भूखंडों पर मकान बनाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई खर्च कर ली है। यदि जांच में किसी भूखंड का संबंध शत्रु संपत्ति से निकलता है और सौदे में गड़बड़ी प्रमाणित होती है, तो खरीदारों के सामने बड़ा कानूनी और आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, किसी भी संपत्ति पर अंतिम कार्रवाई और खरीदारों के अधिकारों का निर्धारण पूरी तरह से राजस्व दस्तावेजों, कानूनों और सक्षम प्राधिकरण के निर्णयों पर निर्भर करेगा।
प्रशासन द्वारा तैयार किया जा रहा यह विस्तृत ब्योरा अंततः केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इस रिपोर्ट के जरिए इन संपत्तियों की वास्तविक भौतिक और कानूनी स्थिति का आकलन होगा, जिससे अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों का भी सटीक समाधान निकल सकेगा।
मुख्य बिंदु:
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर मध्य प्रदेश के कई जिलों में शत्रु संपत्तियों की जांच तेज।
पुराने खसरों, राजस्व रिकॉर्ड और 1974 के उच्च न्यायालय के फैसलों का किया जा रहा मिलान।
बैतूल और भोपाल समेत कई जिलों में अवैध कब्जों और फर्जी नामांतरण की आशंका पर टिकी निगाहें।