दीपावली की खुशियां मातम में बदलीं: कोटा सड़क हादसे ने उजाड़े बैतूल के कई घर, एक ही चिता पर विदा हुए अपनों के साये
बैतूल/कोटा:
त्योहारों की रौनक से सजे घरों में इस वक्त सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा है। दशहरा और दीपावली की खुशियां मनाने की योजनाएं अधूरी रह गईं और देखते ही देखते कई हंसते-खेलते परिवार हमेशा के लिए वीरान हो गए। राजस्थान के कोटा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ एक भीषण सड़क हादसा मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के लिए ऐसा नासूर बन गया है, जिसके जख्म शायद ही कभी भर सकें। खाटूश्यामजी के दर्शनों के लिए निकली श्रद्धालुओं की एक धार्मिक यात्रा ऐसी खौफनाक मंजिल पर जा पहुंची, जहां से कोई लौटकर वापस नहीं आया। इस दर्दनाक हादसे में पिता-बेटी और पति-पत्नी के एक साथ उठे जनाजों ने पत्थर दिल इंसान की भी रूह को कंपा दिया है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस -वे पर काल का ग्रास बनी श्रद्धालुओं की गाड़ी
यह हृदयविदारक हादसा शनिवार (17 अक्टूबर) की सुबह करीब छह बजे कोटा के कराडिया टोल के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ। भोपाल से खाटूश्याम जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से भरी एक तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर जा रही थी। प्रारंभिक जांच और आशंकाओं के मुताबिक, अलसुबह अंधेरा होने और वाहन चालक को झपकी आ जाने के कारण चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिससे अनियंत्रित वाहन करीब 15 फीट नीचे पुलिया से जा गिरा।
यह टक्कर इतनी भयानक थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। अंधेरा होने और गाड़ी के नीचे गिरने के कारण शुरुआती राहत और बचाव कार्यों में भी कुछ मुश्किलें आईं। कई शव सीटों के बीच इस कदर फंस चुके थे कि खिड़कियां तोड़कर उन्हें बाहर निकालना पड़ा। इस वीभत्स दुर्घटना में मध्य प्रदेश के आठ लोगों की जान चली गई, जिनमें सात लोग अकेले बैतूल जिले के मुलताई क्षेत्र के रहने वाले थे, जबकि एक भोपाल का निवासी था। इस हादसे में 17 अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

जब एक साथ उठीं अर्थियां: कोई रोया, तो किसी का कलेजा चीर गया सन्नाटा
रविवार का दिन बैतूल जिले के खेड़ी रामोसी, सिरखेड़, घाट बिरोली और सर्रा गांवों के लिए किसी वज्राघात से कम नहीं था। जब इन गांवों में मृतकों के पार्थिव शरीर पहुंचे, तो हर तरफ कोहराम मच गया।
मुलताई के खेड़ी रामोसी गांव में सहकारिता बैंक में सहायक प्रबंधक (सेल्समैन) के रूप में कार्यरत कृष्णाराव घोड़की अपनी छोटी बेटी त्रिशा के साथ खाटूश्यामजी की यात्रा पर निकले थे। नियति को कुछ और ही मंजूर था। सड़क हादसे में पिता-बेटी दोनों की मौत हो गई। जब रविवार को दोनों की अर्थियां एक साथ घर से उठीं, तो पूरे गांव की आंखें नम थीं। जिस पिता ने बेटी को उंगली पकड़कर चलना सिखाया था और जीवनभर उसकी खुशियों के ताने-बाने बुने थे, उसी लाडली के साथ पिता की भी अर्थी उठी और वर्धा नदी के तट पर दोनों की चिताएं एक साथ जलीं।
कुछ ऐसा ही कलेजा चीर देने वाला मंज़र सिरखेड़ गांव में देखने को मिला, जहां 68 वर्षीय राजकुमार बोड़खे और उनकी 55 वर्षीय पत्नी अनीता बोड़खे एक ही हादसे में दुनिया छोड़ गए। भोपाल के एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले राजकुमार और उनकी पत्नी के शव जब घर पहुंचे, तो कोहराम मच गया। इस पूरी त्रासदी का सबसे भावुक और झकझोर देने वाला पल वह था, जब उनके इकलौते बेटे ने अपने माता-पिता को एक ही चिता पर एक साथ मुखाग्नि दी। कल तक जिस बेटे के सिर पर माता-पिता का सुरक्षित साया था, उसे एक ही झटके में दोनों को कंधा देना पड़ा।
बुझ गए घर के कई इकलौते चिराग
यह सड़क हादसा सिर्फ पतियों-पत्नियों या पिता-पुत्रियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कई उम्मीदों को भी हमेशा के लिए शांत कर दिया। घाट बिरोली गांव की लोकप्रिय और मिलनसार सरकारी शिक्षिका अरुणा झरबड़े के आकस्मिक निधन से पूरा गांव स्तब्ध है। उनके जाने से विद्यालय से लेकर परिवार तक में सूनापन छा गया है। वहीं, दूसरी ओर भोपाल में रहकर मेडिकल की पढ़ाई और इंटर्नशिप कर रहे युवा ओम् सूर्यवंशी का शव जब उनके गृह ग्राम सर्रा पहुंचा, तो उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इसके अलावा, इस हादसे में जान गंवाने वाली वैष्णवी गावंडे के पैतृक गांव में भी मातम पसरा हुआ है।
अधूरा रह गया त्योहार साथ मनाने का सपना
मृतकों के परिजनों ने नम आंखों से बताया कि घर से निकलने से पहले सभी ने यही कहा था कि खाटूश्याम बाबा के दर्शन करके वे जल्द लौटेंगे। परिवारों ने इस बार साथ मिलकर दीपावली का त्योहार मनाने की भव्य योजना बनाई थी। बाजारों में खरीदारी की तैयारियां हो चुकी थीं, घरों में उत्सव का माहौल था। लेकिन एक पल की झपकी और इस क्रूर सड़क हादसे ने सारी खुशियों को मातम में बदल दिया।
त्योहारों की दहलीज पर खड़े बैतूल जिले के इन परिवारों के लिए इस बार की दीपावली कभी न भूलने वाले अंधकार और आंसुओं का सैलाब लेकर आई है। अपनों के खोने का यह दर्द वक्त के साथ शायद ही कभी कम हो सके, लेकिन यह हादसा हर आने-जाने वाले मुसाफिर को सड़क सुरक्षा और सतर्कता का एक बड़ा सबक जरूर दे गया है।