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ये सरकार तपस्वियों का ध्यान नहीं रखती, महाकाल की धरती से राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

By ,बैतूल वार्ता

ये सरकार तपस्वियों का ध्यान नहीं रखती, महाकाल की धरती से राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

मंगलवार को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। राहुल ने कहा कि ये सरकार मजदूर और कामगारों का ध्यान नहीं रखती है जो इस देश के असली तपस्वी हैं। राहुल ने मोदी सरकार के आर्थिक फैसलों को भी गरीब विरोधी बताया।

राहुल ने कहा-तपस्वियों को फल नहीं दे रही सरकार

राहुल ने मोदी सरकार की आथिक नीतियों को बनाया निशाना

उज्जैन: अपनी मध्य प्रदेश की यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को महाकाल नगरी उज्जैन से देश के मेहनतकश लोगों की मेहनत को तपस्या करार देते हुए कहा कि सरकार का काम मेहनत करने वालों को फल देने का है। राहुल ने कहा कि इस सरकार में फल केवल उन्हीं दो-चार लोगों को मिलता है, जो पीएम मोदी और उनकी सरकार की पूजा में लगे हुए हैं। राहुल गांधी ने देश के किसानों, मज़दूरों, बढ़ई, नाई, छोटे व मंझोले व्यापारियों से लेकर छात्रों व उनके परिवार वालों व मीडिया तक को तपस्वी करार देते हुए कि मेहनतकश लोग अपनी पूरा जीवन तप करते करते निकाल देते हैं, लेकिन उन्हें उनकी तपस्या का फल नहीं मिलता। राहुल का कहना था कि उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा में पैदल चल कर कोई तपस्या नहीं की है। असली तपस्या तो कोविड लॉकडाउन के दौरान लंबी दूरी तय करने वाले मजदूर, लोगों के लिए खाद्यान्न पैदा करने वाले किसान और छोटे व्यापारियों की रही है। यही देश के असली ‘तपस्वी’ हैं।

राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार व बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी के लोग भगवान के सामने तो हाथ जोड़ते हैं, लेकिन देश के जो असली तपस्वी हैं, उन्हें खत्म करने का काम करते हैं। ये लोग तपस्वी व भगवान दोनों का अपमान करते हैं। राहुल का कहना था कि बीजेपी राज में इन तपस्वियों के अधिकार से चोरी हो रही है। युवा मेहनत करता है, परीक्षा की तैयारी करता है, एग्जाम देता है, लेकिन व्यापम जैसे घोटालों से उसके अधिकार की चोरी हो जाती है। वहीं, किसानों का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि जो किसान देश का पेट भरते हैं, उन्हें वक्त पर ना तो फर्टिलाइजर मिलता है और ना ही
फसलों की बीमा का पैसा। फसल बर्बाद होने पर किसान बीमा कंपनियों को फोन करते हैं तो ना तो उनका फोन मिलता है और ना ही इंटरनेट पर उन बीमा कंपनियों का पता।

राहुल गांधी ने एक बार फिर जीएसटी व नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। राहुल ने नोटबंदी और जीएसटी को पॉलिसीज ना मानते हुए हथियार करार देते हुए कहा कि इन दोनों हथियारों ने देश के कैशफ्लो को खत्म करने का काम किया है। राहुल का कहना था कि नोटबंदी और जीएसटी ने देश की रीढ़ तोड़ कर रख दी है। छोटे और मझोले कारोबारियों को मदद नहीं दी जाएगी, तब तक इस देश की रीढ़ दोबारा से ठीक नहीं हो सकती, क्योंकि ये देश में रोजगार देने का काम करते हैं। राहुल का कहना था कि देश के मेहनतकशों को दबाया और कुचला जा रहा है।

हिंदुत्व की पिच पर बीजेपी को घेरने की कोशिश
राहुल गांधी ने जहां अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय महाकाल’ के तीन बार के जयकारे के साथ की। वहीं अपने 25 मिनट के भाषण में कई बार तपस्या और तपस्वी शब्द का इस्तेमाल किया। उज्जैन जैसे धार्मिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक नगरी से किए गए अपने संबोधन में राहुल गांधी ने गीता, हिंदु ग्रंथों व दर्शन का हवाला देते हुए बीजेपी को उसके हिंदुत्व की पिच पर घेरने की कोशिश की। कर्म की पूजा, गीता का निस्वार्थ कर्मयोग और गरीबों और मेहनतकशों की मेहनत और संघर्ष को तपस्या करार देते हुए राहुल ने हिंदु धर्म के नर ही नारायण वाली सोच को सामने रखने की कोशिश की। राहुल ने यह संबोधन मध्य प्रदेश के मालवा इलाके में दिया, जो बीजेपी और संघ का गढ़ माना जाता है। राहुल ने सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे बीजेपी को संदेश देने की कोशिश की।

गुजरात के लिए भी संदेश
भले ही राहुल गांधी मौजूदा गुजरात चुनाव में ज्यादा न जा पाएं हों, लेकिन चुनाव के परवान चढ़ने के दौर में उन्होंने मध्य प्रदेश से गुजरात के लिए संदेश दिया, जहां बीजेपी चुनाव में ध्रुवीकरण का तड़का लगाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने महाकाल की धरती से सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड सामने रखते हुए जो संकेत दिया, वह काम करता दिख रहा है। जिस तरह से राहुल गांधी के शिव मंदिरों के दर्शन के बाद बीजेपी ने राहुल को महा मृत्युंजय स्त्रोत सुनाने की चुनौती दी है, उससे कहीं न कहीं उसकी असहजता दिखती है।

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