कषायों से रहित जीवन जिए तो ही मोक्ष के प्राप्त कर सकते हैं: डॉ.बिंदु प्रभा
आज 22 अगस्त मंगलवार को स्थानक भवन में सामूहिक क्षमा याचना
बैतूल। जैन स्थानक भवन में पर्युषण पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी पर्व के अवसर पर डॉ.बिंदु प्रभा म.सा ने कहा कि अंतागढ़ सूत्र में 90 भव्य आत्माओं के जीवन का उल्लेख है। जिसमें अरिष्ट नेमी भगवान और वर्तमान के जैन शासनपति भगवान महावीर का उल्लेख है। उनके जीवन की बातें, क्षमता, तप, त्याग, दया को ही हम अपने जीवन में उतार ले और कषायों से रहित जीवन जिए तो भी हम मोक्ष के प्राप्त कर सकते हैं। पर्यूषण पर्व क्षमा याचना का पर्व है, यदि हम एक दूसरे के प्रति द्वेष ना रखें व बदले की भावना ना रखें उसे सच्चे हृदय से क्षमा कर दे या वह हमें क्षमा करें तो हमारी सच्ची क्षमा याचना होगी मन में राम बगल में छुरी जैसी दुर्भावना को हमें त्यागना होगा। वरन हमारा पर्यूषण पर्व व्यर्थ है, हमारा जीवन पशु तुल्य है, क्षमा विरस्य भूषणम् क्षमा वीरों का आभूषण है, जिसमें क्षमा रुपी नगीने जड़े हैं यह जड़ाऊ आभूषण जब शोभित होगा, जब हमारे हृदय से सच्ची क्षमा निकले, क्षमा राग, द्वेष से रहित होती है। मन में विश्वास के भाव आपस में संबंध बिगाड़ते हैं। हम परस्पर आपस में विश्वास ना करें और प्रेम में वहम ना करें। व्याख्यान के बाद धर्म हौजी का आयोजन किया गया तपस्या करने वाले श्रीमती सरोज बोथरा, मोनिका सुराणा, स्वाति सुराणा, कल्पना गोठी, का बहुमान किया गया। शाम 5:30 बजे सामूहिक प्रतिक्रमण हुआ जिसमें सभी श्रावक, श्राविका, बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने एक दूसरे को क्षमा याचना की। आज 22 अगस्त मंगलवार को स्थानक भवन में सामूहिक क्षमा याचना रखी गई है। उक्त जानकारी मुकेश गोठी व सतीश पारख ने दी।