मूर्ति बनाने के लिए महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण:गोबर और मिट्टी से बनी इकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं, सैकड़ों घरों में विराजेगी
By, बैतूल वार्ता (वामन पोटे )
मूर्ति बनाने के लिए महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण:गोबर और मिट्टी से बनी इकोफ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं, सैकड़ों घरों में विराजेगी
बैतूल/मुलताई।।

मुलताई क्षेत्र के साइखेड़ा खुर्द में मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत गोबर की गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन गणेश प्रतिमाओं को बनाने के लिए गोबर के साथ मिट्टी का भी उपयोग किया जा रहा है।पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी और गोबर की गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही है।
महिलाओं को इसका प्रशिक्षण देकर सैकड़ों की संख्या में गणेश प्रतिमा में इन्हें ग्रामीणों को प्रदान किया जाएगा। विसर्जन के दौरान मूर्तियां पानी में घुल जाएगी।
समाजसेवी श्रीराम, दीपक नरवरे, नारायण सूर्यवंशी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए यह मुहीम चलाई जा रही है। जिसमें गोबर और मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही है।
दीपक ने बताया कि पहले महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया गया था अब सैकड़ो गणेश प्रतिमाएं बनकर तैयार हो गई है।
दीपक ने बताया की गाय के गोबर से निर्मित गणेश जी का पूजन करने का महत्व गर्न्थो में भी बताया गया है। इसके चलते इन प्रतिमाओं के प्रति लोगों में भारी उत्साह है।
गांव की ज्योति बाई अडलक,कुसुम बाई, सुशीला बाई और जयमाला मिलकर प्रतिमाएं बना रही है।
गोबर से बनी गणेश प्रतिमा के पूजन का महत्व
पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि मिट्टी और गोबर की मूर्ति में पंचतत्वों का वास माना जाता है और खासकर गोबर में तो मां लक्ष्मी साक्षात वास करती हैं।
गोबर गणेश प्रतिमा का पूजन करने वाले भक्तों की मान्यता है कि इन प्रतिमाओं का दर्शन करने से भक्तों को भगवान गणेश के साथ मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है।