घोड़ाडोंगरी में ‘मंगल’ की वापसी: खण्डेलवाल की पसंद को मिला राज्यमंत्री दर्जा, सियासी संकेत गहरे
By,वामन पोटे
घोड़ाडोंगरी में ‘मंगल’ की वापसी: खण्डेलवाल की पसंद को मिला राज्यमंत्री दर्जा, सियासी संकेत गहरे
बैतूल, 24 अप्रैल ।। मध्यप्रदेश की सियासत में बैतूल जिले से एक बार फिर ऐसा संकेत उभरा है, जो बताता है कि संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक संरक्षण का असर किस तरह नेताओं के भविष्य को आकार देता है। घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य मंगल सिंह धुर्वे को राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति आयोग का सदस्य नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ ही उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिल गया है, जिससे उनकी सियासी वापसी को अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह नियुक्ति सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह फैसला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल के भरोसे और रणनीति का परिणाम है। खण्डेलवाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से बैतूल जिले के नेताओं को लगातार संगठन और सरकार में अवसर मिल रहे हैं, और मंगल सिंह धुर्वे इसका प्रमुख उदाहरण बनकर उभरे हैं।
मंगल सिंह धुर्वे का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, लेकिन हर बार उन्हें संगठन का संरक्षण मिलता रहा। वर्ष 2015 में उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में खण्डेलवाल की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। इसके बाद 2016 में घोड़ाडोंगरी से विधायक सज्जन सिंह उइके के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पार्टी ने धुर्वे पर भरोसा जताया और वे विधायक बने।
हालांकि 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी टिकट कट गई और पार्टी ने गीता उइके को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह चुनाव हार गईं। इसके बाद भी मंगल सिंह संगठन में सक्रिय रहे, लेकिन मुख्यधारा की राजनीति से कुछ समय के लिए दूर हो गए।
2022 के जिला पंचायत चुनाव में भी उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन राजनीतिक समीकरण बदल गए और राजा पंवार अध्यक्ष बन गए। उस समय मंगल सिंह ने उपाध्यक्ष पद से खुद को अलग कर यह संदेश दिया कि वे संगठन के फैसलों के साथ हैं।
2023 के विधानसभा चुनाव के पहले तक प्रशासनिक स्तर पर भी उन्हें संभावित प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन महिला आरक्षण के चलते पार्टी ने गंगा उइके को उम्मीदवार बनाया। गंगा उइके चुनाव जीतने में सफल रहीं, लेकिन इसके बाद क्षेत्र में उनके और मंगल समर्थकों के बीच खींचतान भी देखने को मिली।
इस दौरान मंगल सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट—“समुद्र का पानी उतरता देख किनारों पर घर नहीं बनाया करते…”—काफी चर्चित रही, जिसे उनकी सियासी वापसी का संकेत माना गया।
अब 2026 में अनुसूचित जनजाति आयोग में सदस्य बनाए जाने के साथ ही उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला है। इसके तहत उन्हें भोपाल में सरकारी आवास, वाहन, वेतन, भत्ता और स्टाफ जैसी सुविधाएं मिलेंगी। यह नियुक्ति न केवल उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी को दर्शाती है, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए उनकी भूमिका को भी मजबूत करती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। संगठन में मजबूत पकड़ और नेतृत्व का समर्थन मिलने से मंगल सिंह धुर्वे एक बार फिर घोड़ाडोंगरी की राजनीति में केंद्रीय चेहरा बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, बैतूल की राजनीति में यह नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि शक्ति संतुलन और भविष्य की रणनीति का संकेत मानी जा रही है।