कंकाल के साथ बैंक पहुंचा भाई: क्योंझर की घटना ने उठाए मानवीय संवेदनाओं और बैंकिंग प्रक्रिया पर सवाल

क्योंझर (ओडिशा), 29 अप्रैल 2026।।
ओडिशा के क्योंझर ज़िले में एक बेहद विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक व्यक्ति अपनी मृत बहन के खाते से पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और बैंकिंग प्रक्रियाओं की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना सोमवार दोपहर की है, जब 52 वर्षीय जीतू मुंडा ओडिशा ग्रामीण बैंक की पाटना ब्लॉक स्थित मल्लीपोशी शाखा में अपनी बहन के अवशेष लेकर पहुंच गए। बैंक परिसर में मौजूद कर्मचारी और ग्राहक इस दृश्य को देखकर सन्न रह गए। जीतू मुंडा का कहना है कि उन्होंने कई बार बैंक प्रबंधन को अपनी बहन की मृत्यु की जानकारी दी, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
जानकारी के अनुसार, जीतू मुंडा की 56 वर्षीय बहन कलरा मुंडा की दो महीने पहले मृत्यु हो चुकी थी। वह पहले जाजपुर ज़िले में अपने पति और बेटे के साथ रहती थीं, लेकिन दोनों की मृत्यु के बाद वह अपने मायके दियानाली गांव लौट आई थीं। यहां वह दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन कर रही थीं। कुछ समय पहले उन्होंने अपना एक बछड़ा बेचकर 19,300 रुपये अपने बैंक खाते में जमा किए थे।
बहन की मृत्यु के बाद जीतू मुंडा इस राशि को निकालने के लिए बैंक पहुंचे, लेकिन बैंक अधिकारियों ने उनसे खाताधारक की उपस्थिति या वैध दस्तावेज़, जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र और क़ानूनी वारिस प्रमाण पत्र, प्रस्तुत करने को कहा। जीतू का आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।
इसी से क्षुब्ध होकर जीतू मुंडा ने एक असामान्य कदम उठाया। वह अपने गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर श्मशान घाट गए, जहां से उन्होंने अपनी बहन के अवशेष निकाले और उन्हें एक जूट की बोरी में भरकर कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गए। भीषण गर्मी में यह दृश्य देखकर बैंक में मौजूद लोग हतप्रभ रह गए।
घटना की सूचना मिलते ही बैंक प्रबंधन ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन को बुलाया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने जीतू मुंडा को समझाया और आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके बाद जीतू ने कंकाल को वापस श्मशान घाट में रख दिया।
इस मामले में बैंक मैनेजर सुषांत कुमार सेठी ने कहा कि जीतू मुंडा से आवश्यक दस्तावेज़ मांगे गए थे। उनके अनुसार, प्रारंभ में जीतू ने बताया था कि उनकी बहन बीमार हैं और बैंक नहीं आ सकतीं, लेकिन बाद में उन्होंने उनकी मृत्यु की बात कही। मैनेजर का कहना है कि खाते में अन्य कानूनी वारिस भी थे, जिसके चलते नियमानुसार प्रक्रिया अपनाना जरूरी था।
घटना के बाद 28 अप्रैल को प्रशासन की मौजूदगी में जांच की गई और खाते में जमा 19,410 रुपये जीतू मुंडा और अन्य दो कानूनी वारिसों के बीच बांट दिए गए। पुलिस ने सभी पक्षों को आपसी सहमति से राशि विभाजित करने की सलाह दी।
इस घटना ने राज्य स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह दाना मांझी की घटना के बाद राज्य में दूसरी ऐसी घटना है, जो प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठाती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, क्योंझर जिला प्रशासन ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि नागरिकों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। घटना की जानकारी मिलते ही जीतू मुंडा को जिला रेड क्रॉस फंड से 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
इसके अलावा प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि परिवार को मृत्य प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रशासन ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए इस प्रकार की अमानवीय स्थिति का सामना करने को मजबूर न हो।
यह घटना न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना कितना आवश्यक है।