मैहर कलेक्टर का सख्त संदेश: “छोटा परिवार ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी”
मैहर, 29 अप्रैल।। मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मैहर में कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने सिविल अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान परिवार नियोजन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया। प्रसूति वार्ड में पांचवीं बार मां बनी एक महिला से मुलाकात के बाद कलेक्टर ने न सिर्फ उसे समझाइश दी, बल्कि मौके पर मौजूद स्वास्थ्य अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
निरीक्षण के दौरान जब कलेक्टर को पता चला कि एक महिला ने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो उन्होंने सीधे उसके पास जाकर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने महिला से पूछा कि मौजूदा महंगाई और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कैसे निभाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बदलते समय में छोटे परिवार की अवधारणा ही बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित कर सकती है।
कलेक्टर मुखर्जी ने मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं और परिजनों को भी संबोधित करते हुए समाज में व्याप्त पुत्र-प्राप्ति की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं और प्रशासनिक सेवाओं में भी उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल बेटे की चाह में बार-बार संतान पैदा करना न केवल परिवार बल्कि समाज के विकास में भी बाधा बनता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में महिला अधिकारी जिम्मेदार पदों पर कार्यरत हैं और मैहर जिले की प्रशासनिक टीम में भी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद यदि समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव बना हुआ है, तो यह चिंताजनक है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर की नाराजगी स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले पर भी साफ दिखाई दी। उन्होंने एएनएम, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई महिला पांचवीं बार मां बन रही है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता अभियान प्रभावी ढंग से नहीं चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति विभागीय तंत्र की विफलता को दर्शाती है।
कलेक्टर ने संबंधित कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय गांव-गांव जाकर लोगों को छोटे परिवार के लाभ, गर्भनिरोधक उपायों और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही कलेक्टर मुखर्जी ने जिले को कुपोषण और एनीमिया मुक्त बनाने के अपने लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार मैदानी स्तर पर संवाद और निगरानी के माध्यम से काम कर रहा है, ताकि हर बच्चे को पर्याप्त पोषण और हर महिला को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जागरूकता कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनके वास्तविक क्रियान्वयन के जरिए लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।
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