भाजपा का ‘सरप्राइज कार्ड’ बन सकते हैं हेमंत खंडेलवाल ? राज्यसभा को लेकर बढ़ी राजनीतिक अटकलें
By, वामन पोटे
भाजपा का ‘सरप्राइज कार्ड’ बन सकते हैं हेमंत खंडेलवाल ? राज्यसभा को लेकर बढ़ी राजनीतिक अटकलें
बैतूल, 31 मई वामन राव पोटे।। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। संभावित उम्मीदवारों के नामों पर लगातार मंथन और अटकलों के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन संगठन में उनकी बढ़ती भूमिका और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक उन्हें संभावित दावेदारों में शामिल मान रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा की कार्यशैली अक्सर पारंपरिक राजनीतिक अनुमानों से अलग रही है। कई अवसरों पर पार्टी ने ऐसे नेताओं को राज्यसभा भेजा है जिनके नाम अंतिम समय तक चर्चाओं में प्रमुखता से नहीं थे। यही कारण है कि हेमंत खंडेलवाल का नाम भले ही सार्वजनिक चर्चाओं की शीर्ष सूची में न दिखाई दे रहा हो, लेकिन राजनीतिक समीकरणों के स्तर पर उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं माना जा रहा।
मध्य प्रदेश भाजपा की कमान संभालने के बाद हेमंत खंडेलवाल ने संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से संवाद, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कई राजनीतिक पर्यवेक्षक उन्हें संगठन के भरोसेमंद नेताओं में गिनते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, क्षेत्रीय संतुलन और भविष्य की राजनीतिक रणनीति जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो हेमंत खंडेलवाल कई मानकों पर उपयुक्त दिखाई देते हैं। वे लंबे समय से पार्टी संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में सक्रिय रहे हैं तथा महाकौशल और मध्य भारत क्षेत्र में उनकी पहचान एक संतुलित और सहज नेता के रूप में बनी है।
भाजपा के भीतर चल रहे संभावित समीकरणों पर नजर डालें तो पार्टी आगामी वर्षों की राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर भी निर्णय ले सकती है। ऐसे में संगठन को मजबूत संदेश देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को राज्यसभा भेजने का विकल्प भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाएगा कि संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिल सकता है।
हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि भाजपा के सामने कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के नाम भी विचाराधीन हो सकते हैं। पार्टी को सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाना होगा। इसी कारण अंतिम निर्णय केवल एक व्यक्ति की दावेदारी पर आधारित नहीं होगा, बल्कि व्यापक राजनीतिक गणित को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में भी हेमंत खंडेलवाल के संभावित राज्यसभा उम्मीदवार बनने की चर्चाएं सुनाई दे रही हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ी है और राज्यसभा उनके लिए अगला स्वाभाविक राजनीतिक पड़ाव हो सकता है। वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि पार्टी उन्हें प्रदेश संगठन में ही बनाए रखकर आगामी चुनावी रणनीतियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना भी पसंद कर सकती है।
दिल्ली और भोपाल के राजनीतिक गलियारों में फिलहाल एक बात पर सहमति दिखाई देती है कि भाजपा के अंतिम निर्णय का अनुमान लगाना आसान नहीं है। पार्टी कई बार चौंकाने वाले फैसले लेकर राजनीतिक चर्चाओं की दिशा बदल चुकी है। ऐसे में राज्यसभा के लिए नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ने तक किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल स्थिति यह है कि हेमंत खंडेलवाल का नाम राजनीतिक संभावनाओं की सूची में मौजूद है, लेकिन अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है। आने वाले दिनों में जब उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा होगी, तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका देने जा रही है या फिर उन्हें संगठन की कमान संभालते हुए प्रदेश की राजनीति में ही बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। तब तक राज्यसभा को लेकर हेमंत खंडेलवाल के नाम पर अटकलों का दौर जारी रहने की संभावना बनी हुई है।