Madhya Pradesh Latest News

शपथ के लिए नहीं थी साड़ी, दूसरों के घर बर्तन मांजने वाली माझी बनीं मंत्री, शुभेंदु कैबिनेट में मिली बड़ी जिम्मेदारी

By, वामन पोटे

शपथ के लिए नहीं थी साड़ी, दूसरों के घर बर्तन मांजने वाली माझी बनीं मंत्री, शुभेंदु कैबिनेट में मिली बड़ी जिम्मेदारी

कभी घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली कलिता माझी अब पश्चिम बंगाल सरकार में राज्यमंत्री बन गई हैं। यह उनकी संघर्षपूर्ण राजनीतिक यात्रा और जनसेवा

दूसरों के घरों में चौका-बर्तन करने वाली कलिता माझी बनीं मंत्री। (सोशल मीडिया)

दुर्गापुर 1 जून  पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में आउसग्राम से विधायक कलिता माझी ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली।

राजनीति को केवल रसूखदारों का क्षेत्र मानने वालों के लिए कलिता का यह सफर एक बड़ा जवाब है। कभी दूसरों के घरों में घरेलू सहायिका के रूप में काम कर महज 4000 रुपये महीने कमाने वाली कलिता का यहां तक पहुंचना भारतीय राजनीति में संघर्ष और धैर्य की एक बड़ी मिसाल बन गया है। उनके इसी जज्बे और कड़े संघर्ष की प्रशंसा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं।

बूथ कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर

गुसकरा नगरपालिका के वार्ड नंबर तीन स्थित माझपुकुर पाड़ की रहने वाली कलिता माझी का जीवन घोर अभावों में बीता है। एक बेहद गरीब परिवार में जन्मीं कलिता की शादी मंगलकोट थाना क्षेत्र के एक गरीब परिवार में हुई थी। उनके पति सुब्रत माझी पेशे से प्लंबर हैं और उनका इकलौता बेटा हाल ही में 12वीं की परीक्षा दे चुका है।

शुरुआत में कलिता राजनीति में नहीं आना चाहती थीं क्योंकि उन्हें डर था कि इससे परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा। हालांकि, जनसेवा की भावना से उन्होंने साल 2014 में एक बूथ कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। परिवार के समर्थन और विशेष रूप से सास और पति के सहयोग से वह राजनीति को पूरा समय दे पाईं।

एक दशक से सक्रिय राजनीति से जुड़ीं कलिता सुबह दो घरों में चौका-बर्तन का काम निपटाकर शाम को पार्टी के प्रचार में निकल जाती थीं। घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनना और उनसे जनसंपर्क बनाना उनकी दिनचर्या बन गया। इसी मेहनत के दम पर उन्होंने नगर संपदिका से लेकर जिला कमेटी तक का सफर तय किया।

हार के बाद भी डटी रहीं मैदान में

पार्टी ने उनकी लगन को देखते हुए 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आउसग्राम सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन तब उन्हें 11,815 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद भी न तो कलिता ने अपना हौसला खोया और न ही पार्टी का उन पर से भरोसा कम हुआ। वह लगातार पांच साल तक जनता के बीच डटी रहीं। इसी का नतीजा रहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें फिर से आउसग्राम सीट से टिकट दिया।

इस बार कलिता ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामाप्रसन्न लोहार को 12,535 मतों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। चुनाव प्रचार के लिए कलिता ने अपने काम से एक महीने की छुट्टी ली थी और जिन घरों में वह काम करती थीं, वे परिवार भी उनकी इस सफलता से बेहद खुश हैं।

अपनी अप्रत्याशित जीत और मंत्री पद की शपथ के बाद कलिता ने अपनी सफलता का श्रेय पार्टी नेतृत्व को देते हुए अपनी यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित की।

कलिता को कितने वोट मिले?

कलिता को कुल 1,07,692 मत प्राप्त हुए। इसमें उन्हें 1,07,134 ईवीएम वोट और 558 पोस्टल बैलेट वोट मिले हैं। इस तरह उन्होंने कुल मतदान का 47.68 प्रतिशत वोट अपने नाम किया।

दूसरे नंबर पर तृणमूल उम्मीदवार

वहीं, दूसरे स्थान पर रहे तृणमूल कांग्रेस के श्यामा को कुल 95,157 वोट मिले, जिनमें 94,694 ईवीएम और 463 पोस्टल बैलेट वोट शामिल हैं।

जंगलमहल के विकास का लिया संकल्प

लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम करने और गरीबी को करीब से देखने के कारण कलिता अपने क्षेत्र की समस्याओं को भली-भांति समझती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10-15 सालों में विकास केवल कुछ खास लोगों तक सीमित रहा और आम जनता की सुध किसी ने नहीं ली।

मंत्री के रूप में कलिता ने अपनी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट कर दी हैं। इलाके में पेयजल, सड़क और पक्के मकानों के घोर अभाव को दूर करना उनका मुख्य लक्ष्य है। स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में एक ढंग का स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है और जंगलों में आग लगने जैसी आपात स्थिति में दूसरी विधानसभाओं से मदद मांगनी पड़ती है।

अब उनका सबसे बड़ा संकल्प आउसग्राम में एक सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनवाना है, ताकि लोगों को इलाज के लिए बर्द्धमान न भागना पड़े। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना को जमीनी स्तर पर लागू करना, पिछड़े वर्गों का उत्थान, युवाओं के लिए रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके विजन का अहम हिस्सा है।

शपथ के बाद मंत्री कलिता माझी ने क्या कहा?

मंत्री पद की शपथ लेने के बाद कलिता माझी ने कहा कि उन्होंने कभी विधायक बनने तक के बारे में नहीं सोचा था, ऐसे में मंत्री बनना तो उनके लिए बिल्कुल अकल्पनीय था। वर्ष 2014 से भाजपा के साथ जुड़कर काम कर रहीं कलिता ने मंत्री पद की शपथ को एक बहुत ही शानदार और सुखद अनुभव बताया।

अपने आगामी कार्यों और जिम्मेदारियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह केवल विधायक थीं, तब उनकी चिंताएं और सोच सिर्फ आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित रहती थीं। अब मंत्री का पदभार संभालने के बाद उनकी जिम्मेदारी व्यापक हो गई है और अब उन्हें पूरे पश्चिम बंगाल के विकास व भलाई के बारे में सोचना है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.