बालाजीपुरम बंदी पर सियासी संग्राम: भाजपा नेता बोले- ‘भगवान को बंधक बनाना आस्था पर प्रहार’ भगवान के दर्शन बंद करना धर्म, आस्था और मानवता के खिलाफ
By, वामन पोटे
बालाजीपुरम बंदी पर सियासी संग्राम: भाजपा नेता बोले- ‘भगवान को बंधक बनाना आस्था पर प्रहार’
भगवान के दर्शन बंद करना धर्म, आस्था और मानवता के खिलाफ

बैतूल, 5 जून । बैतूल के प्रसिद्ध बालाजीपुरम मंदिर को अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने के फैसले पर अब राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मंदिर परिसर में कर्मचारियों पर हुए कथित हमले के विरोध में प्रबंधन द्वारा मंदिर बंद करने के निर्णय का भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष जितेंद्र कपूर ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि किसी विवाद या आपराधिक घटना के कारण भगवान के दर्शन बंद करना धर्म, आस्था और मानवता के खिलाफ है।
कपूर ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि मंदिर परिसर में जो घटना हुई है, वह गंभीर है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होना चाहिए। पीड़ित पक्ष ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है और प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। ऐसे में विवाद का समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि मंदिर के द्वार बंद करके लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बालाजीपुरम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हजारों-लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। दूर-दराज से श्रद्धालु भगवान बालाजी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। मंदिर बंद होने से उन लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
भाजपा नेता ने मंदिर प्रबंधन और संस्थापक सेम वर्मा से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि मंदिर को विरोध या दबाव बनाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पूरी तरह उचित है, लेकिन इसके लिए श्रद्धालुओं को दंडित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता।
कपूर ने कहा, “विवाद चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसका समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए। भगवान के दर्शन पर ताला लगाना धर्म की मूल भावना के विपरीत है। भगवान के दरबार के द्वार हमेशा खुले रहने चाहिए। कानून अपना काम करेगा, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को बालाजीपुरम मंदिर परिसर में जूता स्टैंड पर शुल्क को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि विवाद के दौरान कुछ लोगों ने वहां कार्यरत कर्मचारियों के साथ मारपीट की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद आरोपी मौके से चले गए, लेकिन कुछ समय बाद अन्य लोगों के साथ वापस लौटे और मंदिर परिसर में हंगामा किया। इस दौरान कर्मचारियों के साथ फिर मारपीट किए जाने तथा उन्हें जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
घटना में मंदिर कर्मचारी सुनील जागड़े और मुकेश भारद्वाज घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
घटना के बाद मंदिर प्रबंधन ने आपात बैठक बुलाकर मंदिर को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का निर्णय लिया। मंदिर के संस्थापक सेम वर्मा ने कहा कि मंदिर सेवकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनका आरोप है कि मंदिर परिसर में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग लंबे समय से प्रशासन के समक्ष रखी जा रही थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मंदिर प्रबंधन ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, उनके कथित अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई तथा मंदिर परिसर में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की है। प्रबंधन का कहना है कि जब तक सुरक्षा संबंधी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक मंदिर बंद रहेगा।
इधर मंदिर बंद होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धार्मिक और सामाजिक संगठनों के बीच भी मंदिर बंदी के फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। वहीं भाजपा नेता जितेंद्र कपूर के बयान के बाद यह मामला अब धार्मिक विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनता नजर आ रहा है।