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राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; भाजपा के तीनों प्रत्याशियों की राह हुई आसान

By, वामन पोटे

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द; भाजपा के तीनों प्रत्याशियों की राह हुई आसान

भोपाल, 10 जून । मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम ने नाटकीय मोड़ ले लिया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब राज्यसभा की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताते हुए चुनाव आयोग तथा न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है, जबकि भाजपा इसे तथ्यों को छिपाने का परिणाम बता रही है।
राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारने के बाद राजनीतिक समीकरण बदलने लगे थे। कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की आशंका सताने लगी थी और इसी वजह से पार्टी अपने विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी कर रही थी।
मंगलवार को कांग्रेस के करीब 40 विधायक और उनके परिजन भोपाल एयरपोर्ट पर विशेष विमान से बेंगलुरु रवाना होने की तैयारी में थे। इसी दौरान राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने पूरे चुनावी परिदृश्य को बदल दिया।
नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला बताया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में अपनी तीसरी सीट सुनिश्चित करने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि उम्मीदवार द्वारा हलफनामे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी, जिसके कारण रिटर्निंग अधिकारी ने नियमों के अनुसार कार्रवाई की।
विवाद की जड़ मीनाक्षी नटराजन द्वारा नामांकन के साथ दाखिल किए गए फॉर्म-26 को लेकर है। भाजपा की ओर से शिकायत की गई थी कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी अपने हलफनामे में नहीं दी। भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि नटराजन उस मामले में आरोपी के रूप में नामित हैं और अदालत द्वारा उनसे संबंधित प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है।
रिटर्निंग अधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित मामले में अदालत संज्ञान ले चुकी थी तथा उम्मीदवार को नोटिस जारी किया गया था। साथ ही उनके द्वारा अदालत में जवाब भी प्रस्तुत किया गया था। इस आधार पर हलफनामे को अधूरा और तथ्य छिपाने वाला माना गया तथा नामांकन निरस्त कर दिया गया।
हालांकि कांग्रेस इस निष्कर्ष से सहमत नहीं है। मीनाक्षी नटराजन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अजय गुप्ता का कहना है कि संबंधित मामला एक निजी शिकायत से जुड़ा हुआ है और उसे आपराधिक मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उनका तर्क है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223(1) के तहत जारी नोटिस केवल प्रस्तावित आरोपी को सुनवाई का अवसर देने के लिए था। उनके अनुसार अदालत ने अंतिम रूप से संज्ञान नहीं लिया था और न ही कोई नियमित समन जारी किया गया था, इसलिए इसे लंबित आपराधिक मामला मानना उचित नहीं है।
यही कानूनी बिंदु अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। भाजपा का कहना है कि अदालत की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी, इसलिए मामले का उल्लेख हलफनामे में अनिवार्य था। वहीं कांग्रेस का दावा है कि ऐसा कोई कानूनी दायित्व नहीं बनता था और नामांकन रद्द करना अनुचित है।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस की कानूनी तैयारी में कोई चूक हुई। पार्टी के भीतर भी इस सवाल पर मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सितंबर 2025 में अदालत से नोटिस जारी हुआ था और अक्टूबर 2025 में उसका जवाब भी दाखिल किया जा चुका था, तो नामांकन दाखिल करने से पहले कानूनी स्थिति की विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए थी।
कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पार्टी का पूरा ध्यान विधायकों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग रोकने पर केंद्रित था। भाजपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी पहले से ही सतर्क थी और उसे आशंका थी कि सत्ता पक्ष किसी भी रणनीति का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में संगठन का फोकस राजनीतिक प्रबंधन पर अधिक रहा।
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि संबंधित दस्तावेज कांग्रेस के भीतर से ही भाजपा तक पहुंचे थे। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि उम्मीदवार ने सभी तथ्यों का खुलासा किया होता तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 11 जून दोपहर तीन बजे निर्धारित है। यदि उससे पहले चुनाव आयोग या न्यायालय से कांग्रेस को राहत नहीं मिलती है तो चुनावी मुकाबला समाप्त हो जाएगा और भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अधिक लाभ भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मिलता दिखाई दे रहा है। बुंदेलखंड क्षेत्र के निवाड़ी जिले के ओरछा से आने वाले महेश केवट लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। छात्र राजनीति से लेकर संगठन के विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके केवट वर्तमान में मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
उनकी उम्मीदवारी को भाजपा की सामाजिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। केवट समुदाय से आने वाले महेश केवट के माध्यम से भाजपा पिछड़ा वर्ग, विशेषकर निषाद और मछुआरा समाज में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का संदेश देना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल राज्यसभा सीट का मामला नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश भी है।
फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर असमंजस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रही है, जबकि भाजपा इसे अपनी रणनीतिक सफलता के रूप में देख रही है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग और न्यायालय के संभावित फैसलों पर टिकी हुई है, जो यह तय करेंगे कि राज्यसभा की तीनों सीटों पर अंतिम तस्वीर क्या होगी।

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