दतिया उपचुनाव में भाजपा का बड़ा दांव, नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी पर भरोसा
भोपाल/दतिया, 10 जुलाई । मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित विधानसभा सीटों में शामिल दतिया में होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया है। उनकी जगह संगठन के पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता, पूर्व संभागीय संगठन मंत्री तथा मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया गया है।
भाजपा के इस फैसले को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि उपचुनाव में पार्टी एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाएगी। मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे, समाज प्रमुखों से मुलाकातें कर रहे थे और चुनावी तैयारियों में जुटे हुए थे। ऐसे में टिकट की घोषणा ने राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं को भी चौंका दिया।
आशुतोष तिवारी दतिया के मूल निवासी हैं और संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। भाजपा के भीतर उनकी पहचान एक अनुशासित और संगठनात्मक कार्यकर्ता की रही है। पार्टी नेतृत्व ने ऐसे समय में उन्हें उम्मीदवार बनाकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह उपचुनाव में नए चेहरे के साथ चुनावी मुकाबला लड़ना चाहती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह निर्णय केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी फीडबैक और आंतरिक सर्वे रिपोर्ट के बाद लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व को मिली रिपोर्ट में क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता और नए चेहरे की मांग का संकेत मिला था। हालांकि भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
टिकट बदलने के फैसले के बाद नरोत्तम मिश्रा समर्थकों में नाराजगी भी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को पूरी तरह एकजुट रखते हुए चुनाव मैदान में उतरने की होगी।
दतिया विधानसभा सीट इस समय उपचुनाव की स्थिति में इसलिए आई क्योंकि कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो गई। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। बाद में सहकारी बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले में अदालत द्वारा तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और सीट रिक्त हो गई।
दतिया सीट का राजनीतिक महत्व केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह सीट लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पहचान का केंद्र रही है। उन्होंने यहां लगातार कई चुनाव जीतकर भाजपा का मजबूत गढ़ तैयार किया था। वर्ष 2023 में मिली हार के बाद पार्टी के सामने इस सीट को दोबारा जीतने की चुनौती है।
वहीं कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कम महत्वपूर्ण नहीं है। पार्टी को इस सीट पर अपनी पिछली जीत को बरकरार रखने की चुनौती का सामना करना होगा। राजेंद्र भारती के चुनाव मैदान में नहीं रहने की स्थिति में कांग्रेस नए उम्मीदवार के सहारे अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति तैयार कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का उम्मीदवार बदलने का फैसला चुनावी मुकाबले को और रोचक बना सकता है। एक ओर संगठन की मजबूत पृष्ठभूमि वाले आशुतोष तिवारी हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस अपने नए चेहरे के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दे, संगठन की ताकत और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत स्वीकार्यता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
दतिया उपचुनाव अब केवल रिक्त सीट भरने का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसे भाजपा और कांग्रेस दोनों की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के लिए यह खोया हुआ गढ़ वापस पाने की परीक्षा है, जबकि कांग्रेस के लिए पिछली जीत को दोहराने की चुनौती। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा कि दतिया की जनता किस पर अपना भरोसा जताती है।
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