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MP में मिड-डे मील का महाघोटाला? 74 हजार रसोइयों के भुगतान पर सरकार का बड़ा एक्शन, e-KYC से खुलेगी ‘फर्जी खातों’ की पूरी पोल

By, वामन पोटे

MP में मिड-डे मील का महाघोटाला? 74 हजार रसोइयों के भुगतान पर सरकार का बड़ा एक्शन, e-KYC से खुलेगी ‘फर्जी खातों’ की पूरी पोल
भोपाल/बैतूल, 13 जुलाई। मध्य प्रदेश की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में रोजाना 55 लाख से ज्यादा बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनाने वाले 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के भुगतान रिकॉर्ड की जांच में चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आई हैं। रिकॉर्ड में रसोइयों के नाम और पते सही मिले, लेकिन उनसे जुड़े बैंक खाते किसी और के निकले।
इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए आदेश जारी कर दिए हैं कि अब e-KYC, समग्र आईडी और बैंक खाते का सत्यापन पूरा होने के बाद ही मानदेय जारी किया जाएगा। यानी जब तक रसोइया अपनी पहचान और बैंक खाते का मिलान नहीं कराएगा, तब तक भुगतान नहीं होगा।
हर महीने 14.8 करोड़ का भुगतान, अब हर खाते की होगी जांच
प्रदेश में 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों को हर महीने लगभग 14.8 करोड़ रुपये मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। ऑडिट में सामने आया कि कई मामलों में भुगतान ऐसे बैंक खातों में दर्ज था, जिनका संबंध संबंधित रसोइयों से नहीं था। कहीं बैंक खाते दूसरे लोगों के थे तो कहीं एक ही व्यक्ति का पंजीयन अलग-अलग स्कूलों में दर्ज होने की आशंका भी सामने आई।
यानी सवाल यह है कि क्या वर्षों से सरकारी पैसा गलत खातों में जा रहा था? इसी आशंका ने सरकार को पूरे प्रदेश में व्यापक सत्यापन अभियान चलाने पर मजबूर कर दिया है।
20 जुलाई तक हर रसोइए का होगा e-KYC और भौतिक सत्यापन
स्कूल शिक्षा विभाग ने 6 जुलाई को सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि 20 जुलाई 2026 तक सभी रसोइयों और सहायकों का e-KYC, समग्र आईडी सत्यापन और आधार से जुड़े बैंक खातों का मिलान अनिवार्य रूप से पूरा कराया जाए।
सिर्फ ऑनलाइन दस्तावेज ही नहीं, बल्कि प्रत्येक रसोइए का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रिकॉर्ड में दर्ज व्यक्ति वास्तव में उसी स्कूल में कार्यरत है।
गड़बड़ी मिली तो होगी एफआईआर
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच के दौरान फर्जी पंजीयन, डुप्लीकेट रिकॉर्ड या किसी अन्य व्यक्ति के खाते में भुगतान जैसी गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों और विकासखंड स्तर के अधिकारियों को जांच रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत करनी होगी। पूरी प्रक्रिया की जिला और राज्य स्तर से लगातार निगरानी की जाएगी।
एक स्कूल में जरूरत से ज्यादा रसोइए मिले तो नहीं मिलेगा पैसा
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइयों का पंजीयन पाया जाता है तो अतिरिक्त रसोइयों का मानदेय सरकार नहीं देगी। ऐसी स्थिति में भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी पर होगी।
इस फैसले का उद्देश्य फर्जी पंजीयन और अनियमित भुगतान पर पूरी तरह रोक लगाना बताया गया है।
Education Portal 3.0 से जोड़ा गया PM POSHAN पोर्टल
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने Education Portal 3.0 की लॉगिन आईडी को PM POSHAN पोर्टल से जोड़ दिया है। अब स्कूलों के प्रधानाध्यापक केवल अधिकृत यूजर आईडी और पासवर्ड से ही लॉगिन कर सकेंगे। विकासखंड स्तर के अधिकारियों के लिए भी पंजीकृत लॉगिन आईडी अनिवार्य कर दी गई है, ताकि रिकॉर्ड में मनमाने बदलाव की संभावना कम हो।
20 साल बाद रिकॉर्ड पर उठे सवाल
योजना से जुड़े कर्मचारी संगठनों ने भी इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अस्थायी एवं आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि यह योजना करीब 20 वर्षों से संचालित हो रही है, लेकिन आज तक सरकार के पास रसोइयों का सटीक और प्रमाणित रिकॉर्ड नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी संकेत करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल…
प्रदेश में वर्षों से करोड़ों रुपये का मानदेय जारी होता रहा। यदि ऑडिट में बैंक खातों का इतना बड़ा मिसमैच सामने आया है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकारी धन गलत लोगों तक पहुंचता रहा? क्या फर्जी पंजीयन के जरिए भुगतान निकाला गया? और यदि ऐसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
सरकार ने फिलहाल पूरे सिस्टम की जांच शुरू कर दी है। अब 20 जुलाई तक होने वाला e-KYC, बैंक खातों का मिलान और भौतिक सत्यापन तय करेगा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों की इस महत्वपूर्ण योजना में केवल तकनीकी त्रुटि थी या फिर करोड़ों रुपये के भुगतान में कोई बड़ा खेल छिपा हुआ है।

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