15 साल का साथ एक ही दिन थमा, मालिक के अंतिम दर्शन के कुछ देर बाद पालतू श्वान ने भी तोड़ा दम; गंज मोक्षधाम में दोनों को साथ दी गई अंतिम विदाई
By, वामन पोटे
मालिक की विदाई का गम नहीं सह पाया ‘डुग्गू’, बैतूल में एक साथ निकली इंसान और उसके सबसे वफादार साथी की अंतिम यात्रा

15 साल का साथ एक ही दिन थमा, मालिक के अंतिम दर्शन के कुछ देर बाद पालतू श्वान ने भी तोड़ा दम; गंज मोक्षधाम में दोनों को साथ दी गई अंतिम विदाई
बैतूल, 14 जुलाई ।।
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में इंसान और उसके पालतू श्वान के बीच अटूट प्रेम और वफादारी की ऐसी मार्मिक कहानी सामने आई, जिसने अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। शहर के गंज क्षेत्र निवासी और चाय-पान की दुकान संचालित करने वाले 67 वर्षीय प्रदीप जैन का भोपाल में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन का सदमा 15 वर्षों से उनके साथ रह रहे पालतू श्वान ‘डुग्गू’ के लिए भी असहनीय साबित हुआ। मालिक की अंतिम यात्रा शुरू होने के कुछ ही देर बाद डुग्गू ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार ने दोनों को एक ही दिन सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।
परिजनों के अनुसार प्रदीप जैन पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे और भोपाल के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार को उनका निधन हो गया। देर रात उनका पार्थिव शरीर बैतूल स्थित निवास पर लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसी दौरान घर का सबसे बेचैन सदस्य था डुग्गू, जिसने करीब डेढ़ दशक तक प्रदीप जैन का साथ निभाया था।
मृतक की पत्नी विद्या जैन ने बताया कि जैसे ही पार्थिव शरीर घर पहुंचा, डुग्गू लगातार अपने मालिक के पास जाने की कोशिश करने लगा। घर में लोगों की भीड़ और अंतिम संस्कार की तैयारियों के कारण उसे दूसरे कमरे में रखना पड़ा, लेकिन वह पूरी रात बेचैन रहा। वह बार-बार दरवाजे की ओर दौड़ता, भौंकता और बाहर निकलने का प्रयास करता रहा। परिवार का कहना है कि उसका व्यवहार सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था, मानो उसे अपने मालिक के हमेशा के लिए बिछड़ जाने का आभास हो गया हो।
सोमवार को अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं तो परिवार के सदस्यों ने डुग्गू को प्रदीप जैन के पार्थिव शरीर के पास ले जाकर बैठाया। वहां वह काफी देर तक बिना हिले-डुले अपने मालिक को एकटक निहारता रहा। उस समय मौजूद कई लोगों ने देखा कि डुग्गू असामान्य रूप से शांत था। कुछ देर बाद वह धीरे-धीरे घर के भीतर चला गया।
परिजनों के मुताबिक जैसे ही प्रदीप जैन की अर्थी घर से रवाना हुई और अंतिम यात्रा आगे बढ़ी, डुग्गू ने घर के एक कमरे में दो-तीन चक्कर लगाए और फिर वहीं लेट गया। जब परिवार के सदस्य उसके पास पहुंचे तो उसकी सांसें थम चुकी थीं। डुग्गू की अचानक मौत की खबर सुनते ही परिवार और अंतिम यात्रा में शामिल लोग भावुक हो उठे। कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
मृतक के छोटे भाई दिलीप जैन ने बताया कि डुग्गू लगभग दो माह की उम्र में घर आया था और तब से परिवार का अभिन्न सदस्य बन गया था। प्रदीप जैन जब भी दुकान से लौटते थे, डुग्गू दरवाजे पर उनका इंतजार करता था। वह उनके साथ बैठता, उनके पीछे-पीछे चलता और अक्सर उनके साथ ही भोजन करता था। यदि प्रदीप जैन किसी कारण से अस्वस्थ रहते, तो डुग्गू भी उदास हो जाता और कई बार खाना तक छोड़ देता था।
बेटे विवेक जैन ने बताया कि डुग्गू केवल एक पालतू जानवर नहीं था, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह था। उसके व्यवहार में हमेशा अपनापन और स्नेह दिखाई देता था। परिवार का मानना है कि वर्षों से बने भावनात्मक रिश्ते का टूटना वह सहन नहीं कर पाया और अपने प्रिय मालिक के जाने के कुछ ही समय बाद उसने भी दुनिया छोड़ दी।
इसके बाद परिवार ने डुग्गू को भी वही सम्मान दिया, जो किसी अपने को दिया जाता है। गंज मोक्षधाम में जहां प्रदीप जैन का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया, वहीं श्मशान परिसर के समीप डुग्गू को सम्मानपूर्वक दफनाया गया। एक ही दिन मालिक और उसके सबसे वफादार साथी की अंतिम विदाई का यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए बेहद भावुक पल बन गया।
पशु व्यवहार विशेषज्ञों के अनुसार डुग्गू इंडियन स्पिट्ज नस्ल का श्वान था। यह नस्ल अपने मालिक और परिवार के प्रति गहरे भावनात्मक लगाव तथा वफादारी के लिए जानी जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक साथ रहने वाले पालतू श्वान अपने मालिक की दिनचर्या और उपस्थिति से गहराई से जुड़ जाते हैं। ऐसे में अचानक बिछड़ने पर वे तनाव, बेचैनी और गहरे अवसाद जैसी स्थिति का अनुभव कर सकते हैं। बैतूल की यह घटना इंसान और बेजुबान के बीच विश्वास, अपनापन और निस्वार्थ प्रेम के उस रिश्ते की मिसाल बन गई, जो आखिरी सांस तक कायम रहा।
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