अमेरिकी अदालत में अडानी का शपथपत्र: वकीलों ने 10 अरब डॉलर निवेश प्रस्ताव का जिक्र किया, डीओजे ने ठुकराया
By, वामन पोटे
अमेरिकी अदालत में अडानी का शपथपत्र: वकीलों ने 10 अरब डॉलर निवेश प्रस्ताव का जिक्र किया, डीओजे ने ठुकराया
नई दिल्ली, 17 जुलाई । उद्योगपति गौतम अडानी ने पहली बार अमेरिकी अदालत में दाखिल शपथपत्र में स्वीकार किया है कि उनके वकीलों ने अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के साथ समझौता वार्ता के दौरान अमेरिका में 10 अरब डॉलर के प्रस्तावित निवेश का उल्लेख किया था। हालांकि, डीओजे ने स्पष्ट कर दिया था कि आपराधिक मामले के निपटारे या अभियोग वापस लेने के संबंध में इस निवेश प्रस्ताव पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट स्थित अमेरिकी जिला अदालत में दाखिल शपथपत्र में अडानी ने कहा कि उन्हें जानकारी दी गई थी कि उनके वकीलों ने सुझाव रखा था कि अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की उनकी सार्वजनिक घोषणा को, यदि डीओजे या अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) चाहे, तो लंबित मामलों के समाधान का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अडानी ने शपथपत्र में कहा कि उनकी समझ के अनुसार बाद में डीओजे ने स्पष्ट कर दिया था कि आपराधिक मामला खारिज करने के निर्णय में इस संभावित निवेश को कोई महत्व नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक, न्याय विभाग द्वारा मामला वापस लेने के फैसले में इस निवेश प्रस्ताव की कोई भूमिका नहीं रही।
शपथपत्र के अनुसार, यह प्रस्ताव अडानी की 13 नवंबर 2024 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई उस सार्वजनिक घोषणा से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 10 अरब डॉलर निवेश करने तथा लगभग 15,000 रोजगार सृजित करने की बात कही थी।
अडानी ने अदालत को बताया कि जब उन्होंने यह घोषणा की थी, तब तक डीओजे का अभियोग और एसईसी की शिकायत सार्वजनिक नहीं हुई थी, इसलिए उन्हें इनकी जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अभियोग सार्वजनिक होने से पहले उन्हें अमेरिकी जांच के बारे में कोई जानकारी थी या नहीं।
डीओजे के अभियोग के अनुसार, 17 मार्च 2023 को एफबीआई एजेंट गौतम अडानी के भतीजे और सह-आरोपी सागर अडानी के पास तलाशी वारंट लेकर पहुंचे थे। एजेंटों ने उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे और उन्हें ऐसा वारंट सौंपा था, जिसमें जांच के दायरे में आने वाले कथित अपराधों, व्यक्तियों और संस्थाओं का उल्लेख था।
अडानी का यह शपथपत्र अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराफिस के निर्देश पर दाखिल किया गया। न्यायाधीश ने पिछले सप्ताह अडानी से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या अभियोग वापस लेने के पीछे सरकार और बचाव पक्ष के बीच कोई ऐसा समझौता हुआ था, जिसका अदालत के समक्ष खुलासा नहीं किया गया।
जज ने अडानी से पूछा था कि क्या उन्हें ऐसी किसी पेशकश, वादे, सहमति या लेन-देन की जानकारी है, जो नवंबर 2024 के अभियोग को वापस लेने के फैसले से जुड़ा हो। इसके जवाब में अडानी ने स्पष्ट रूप से “नहीं” कहा।
उन्होंने अदालत को बताया कि उनके वकीलों और डीओजे के बीच केवल एसईसी के समानांतर चल रहे मामले तथा ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) की अलग जांच के निपटारे को लेकर बातचीत हुई थी। इसके अलावा उन्हें किसी ऐसे समझौते या लेन-देन की जानकारी नहीं है, जिसके बदले अभियोग वापस लेने पर सहमति बनी हो।
अडानी के वकील मार्क मुकैसी जेफ्रा ने अदालत में कहा कि डीओजे की जस्टिस मैनुअल के अनुसार अभियोजक किसी मामले के निपटारे के दौरान उन निर्दोष शेयरधारकों, कर्मचारियों, पेंशनधारकों और अन्य हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विचार करते हैं, जिनकी व्यक्तिगत रूप से कोई भूमिका नहीं होती।
उन्होंने कहा कि 10 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव का उल्लेख केवल यह बताने के लिए किया गया था कि लंबित आपराधिक आरोपों के कारण अडानी समूह की अमेरिका में निवेश क्षमता और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
वकील ने यह भी खुलासा किया कि 11 मई को अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला ने ईमेल के माध्यम से बचाव पक्ष को स्पष्ट कर दिया था कि आपराधिक मामले के समाधान के बदले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश के सामान्य प्रस्ताव को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस पर कोई विचार भी नहीं होगा।
इसके बाद बचाव पक्ष ने इस निवेश प्रस्ताव का दोबारा उल्लेख नहीं किया। साथ ही, डीओजे, एसईसी और ओएफएसी के साथ बाद में हुई किसी भी समझौता वार्ता में इस निवेश प्रस्ताव को शामिल नहीं किया गया और न ही इसे किसी शर्त का हिस्सा बनाया गया।
गौरतलब है कि 4 जुलाई को डीओजे ने अदालत में दाखिल अपने आवेदन में स्वीकार किया था कि अमेरिका में प्रस्तावित निवेश को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन उसने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया था, जिनमें दावा किया गया था कि निवेश प्रस्ताव के कारण अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला वापस लेने का निर्णय लिया गया।
फिलहाल अमेरिकी अदालत ने डीओजे की ओर से अभियोग खारिज करने के अनुरोध पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है।