गोटमार मेले में 500 से ज्यादा लोग घायल:पांढुर्णा में किसी का सिर फूटा तो किसी का पैर फ्रैक्चर, भीड़ में फंसी एम्बुलेंस
By,वामन पोटे
गोटमार मेले में 500 से ज्यादा लोग घायल:पांढुर्णा में किसी का सिर फूटा तो किसी का पैर फ्रैक्चर, भीड़ में फंसी एम्बुलेंस

चार घंटे में 500 लोग हुए घायल, कलेक्टर ने लगाई धारा 144, परंपरा के नाम पर जारी है खूनी खेल

पांढुर्णा।।पांढुर्णा में परंपरा के नाम पर खूनी खेल शनिवार को एक बार फिर खेला जा रहा है। गोटमार मेला सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ। जाम नदी पर पांढुर्णा और सावरगांव की ओर से एक-दूसरे पर पत्थरों की बौछार हो रही है। 4 बजे तक 500 से ज्याद लोग घायल हुए हैं।

घायलों के लिए 6 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। मौके पर 600 पुलिस जवान, 58 डॉक्टर और 200 मेडिकल स्टाफ तैनात है। कलेक्टर अजय देव शर्मा ने धारा 144 भी लागू कर दी है।

अब तक 13 लोगों की गई जान
पत्थरबाजी में 1955 से 2023 तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें एक ही परिवार के तीन लोगों की जान गई है। इसके अलावा, कइयों ने हाथ-पैर, आंख खो दिए। लोग इसे हर साल दोगुने उत्साह से खेलते हों, लेकिन अपनों को खोने वाले परिवार इसे शोक दिन के रूप में मनाते हैं। पांढुर्णा थाना प्रभारी अजय मरकाम के मुताबिक इनमें से किसी ने भी थाने में शिकायत तक नहीं की, जिससे मेले से संबंधित कोई केस दर्ज नहीं हो सका।
ऐसे होती है गोटमार मेले की शुरुआत
जाम नदी में चंडी माता की पूजा के बाद साबर गांव के लोग पलाश के कटे पेड़ को नदी के बीच लगाते हैं। इसके बाद दोनों गांव पांढुर्णा और साबर गांव के लोगों के बीच पत्थरबाजी होती है। साबर गांव के लोग पलाश का पेड़ और झंडा नहीं निकालने देते, वे इसे लड़की मानकर रक्षा करते हैं। इस झंडे को जंगल से लाने की परंपरा पीढ़ियों से सावरगांव निवासी सुरेश कावले का परिवार करता है। वहीं, पांढुर्णा के लोग पत्थरबाजी कर पलाश का पेड़ कब्जे में लेने का प्रयास करते हैं। अंत में झंडे को तोड़ लेने के बाद दोनों पक्ष मिलकर चंडी मां की पूजा कर इस गोटमार को खत्म करते हैं।
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