Madhya Pradesh Latest News

मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान पर सवाल: ‘मेरे पास टाइम नहीं है’ कहकर शिकायतें सुने बिना लौटे जिला अधिकारी

By,वामन पोटे

मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान पर सवाल: ‘मेरे पास टाइम नहीं है’ कहकर शिकायतें सुने बिना लौटे जिला अधिकारी

बैतूल, 12 सितंबर। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याएं गांव में पहुंचकर सुनना और उनका मौके पर निराकरण करना है, लेकिन बैतूल जिले के शाहपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत काजली में इस अभियान की जमीनी तस्वीर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी शिकायतें सुनने के लिए भेजे गए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी ने उनकी बात तक नहीं सुनी और यह कहते हुए वापस लौट गए कि उनके पास समय नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर जिला पंजीयक दिनेश कौसले को ग्राम पंचायत काजली में नोडल अधिकारी के रूप में भेजा गया था। उन्हें ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के साथ ही पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों का निरीक्षण करना था। ग्रामीण शिकायतों और निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर अधिकारी से मिलने ग्राम पंचायत भवन पहुंचे थे।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अधिकारी के सामने अपनी समस्याएं रखने और पंचायत के निर्माण कार्यों का निरीक्षण कराने की मांग की, लेकिन उनकी शिकायतें सुने बिना ही अधिकारी अपने वाहन में बैठकर रवाना हो गए। ग्रामीणों ने इस दौरान घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। वायरल वीडियो में कुछ ग्रामीण अधिकारी से शिकायत करते नजर आ रहे हैं, जबकि अधिकारी वाहन में बैठकर वहां से जाते दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारी ने उनसे कहा कि उनके पास ‘टाइम नहीं है’। इसके बाद वे बिना शिकायत सुने ही वहां से चले गए। इस घटना ने मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलेक्टर ने भेजा था, फिर ग्रामीणों की बात क्यों नहीं सुनी?
दरअसल, मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ शाहपुर ब्लॉक के ग्राम आंवरिया और तारा पहुंचे थे। इस दौरान ग्राम पंचायत काजली के ग्रामीणों ने पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता की शिकायत कलेक्टर से की थी।
कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला पंजीयक दिनेश कौसले को काजली का नोडल अधिकारी बनाकर वहां भेजा। साथ ही अलग-अलग जिला अधिकारियों को शाहपुर विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में भेजकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनने और उन्हें शुक्रवार दोपहर बाद शाहपुर में आयोजित जन संवाद में रखने के निर्देश दिए गए थे।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिला स्तरीय अधिकारी को ग्रामीणों की शिकायत सुनने और मौके की स्थिति देखने के लिए भेजा गया था, तो फिर शिकायतकर्ताओं की बात सुने बिना अधिकारी वापस कैसे लौट गए?
ग्रामीणों ने लगाए कागजी खानापूर्ति के आरोप
ग्राम काजली के रामदास उईके, ज्ञानसिंग परते, पूर्व सरपंच चानूसिंग, साहबलाल, मुकेश परते उपसरपंच, इत्तूलाल, राजमल काजले, लखमू उईके, चरणसिंह, पिंटू उईके, सुमरत कुमरे और रिंकेश कलमे सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे अपनी समस्याएं लेकर पंचायत भवन पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की स्थिति भी अधिकारी को दिखाने की बात कही, लेकिन अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नोडल अधिकारी केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए गांव पहुंचे थे। उनका कहना है कि यदि अधिकारी ग्रामीणों की शिकायत ही नहीं सुनेंगे तो फिर अभियान का उद्देश्य क्या रह जाएगा?
जनविश्वास अभियान में ‘समय’ सबसे बड़ी समस्या?
इस घटनाक्रम ने अभियान की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान में अधिकारियों को गांवों तक भेजकर ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित करने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यही है कि ग्रामीणों को अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय या तहसील कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।
लेकिन काजली की घटना में ग्रामीणों का आरोप सही है तो स्थिति इसके उलट नजर आती है। शिकायतकर्ता अधिकारी के पास पहुंचे, लेकिन अधिकारी के पास उनकी शिकायत सुनने का समय नहीं था। ऐसे में सवाल है कि क्या ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के लिए अधिकारियों को पर्याप्त समय दिया गया था?
दूसरा सवाल यह भी है कि जब ग्रामीणों ने पंचायत के निर्माण कार्यों में अनियमितता की शिकायत की थी, तो क्या मौके पर जाकर निर्माण कार्यों की जांच की गई?
तीसरा सवाल है कि यदि नोडल अधिकारी ने शिकायतें नहीं सुनीं और निरीक्षण भी नहीं किया तो अभियान की रिपोर्ट में क्या दर्ज किया गया?
और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान केवल शिविर, दौरे और कागजी रिपोर्ट तक सीमित होकर रह जाएगा या ग्रामीणों की शिकायतों का वास्तविक समाधान भी होगा?
ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की जांच और पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या जवाब दिया जाता है, इस पर ग्रामीणों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भी नजर है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.