खसखस के बहाने अफीम की हो रही है खेती, अंजान है किसान 72 घंटे में दो खेत में पकड़ाई अफीम की फसल
By,वामन पोटे
खसखस के बहाने अफीम की हो रही है खेती, अंजान है किसान
72 घंटे में दो खेत में पकड़ाई अफीम की फसल
बैतूल ।। यू तो मध्यप्रदेश के नीमच मंदसौर जिले में अफीम की खेती होती है जिसे सरकार लायसेंस देती है ।लेकिन बैतूल जिले में हुई अफीम की खेती ने मध्यप्रदेश के पुलिस महकमे के पूरे देश में हलचल मचा दी है। पुलिस भले ही इस अफीम की खेती को लेकर किसानों पर आरोप मढ रही हैं।लेकिन मुख्य आरोपी अभी पुलिस के हाथ ही नहीं लगे हैं।
बीते एक सप्ताह में दो आदिवासी गांवों में अफीम के खेती पुलिस ने पकड़ी है अब पुलिस इस खेती के तार जोड़ने में लगी है कि कोई बड़ा नशे का गिरोह तो इस धंधे में तो नहीं जुड़ा है।पुलिस विभाग लाख दावे करे कि उनका सूचना तंत्र बेहद मजबूत है परंतु ये बात अब बेमानी साबित हो रही है।बैतूल जिले में बीते कई वर्षों से नशे की खेती हो रही है।अफीम के खेती के पहले यहां बड़े पैमाने पर गांजे की खेती भी पकड़ाई है पर उस पर ध्यान ही नहीं दिया जिसका परिणाम अब अफीम के खेत जिले में लहलहा रहे हैं।हालांकि पुलिस विभाग अभी नशे के खास गिरोह तक तो नहीं पहुंच पाई है परंतु जिन किसानों ने अपने खेत ठेके पर दिए थे उन्हीं किसानों को पुलिस ने मुलजिम बनाया है।।

अफीम से निकाली जाती है खसखस लेकिन…!
पहले तो यह जान लें कि खसखस क्या है और यह कहां से आता है। जान जाएंगे तो चौकेंगे भी और हैरान भी हो जाएंगे। असल में खसखस अफीम के बंदफूल या डोडे से निकले बारीक बीज हैं, जिनमें अफीम के विपरित नशा नहीं होता, लेकिन प्रकृति तो अफीम से ही जुड़ी हुई है। जब अफीम के डोडे में चीरा लगाया जाता है और अफीम या अन्य नशीले पदार्थ बनाने के लिए सारा लिक्विड निकाल लिया जाता है तो इस बचे और सूख गए डोडे में ढेरों बारीक बीज होते हैं, वे ही खसखस कहलाते हैं।
दुनिया का यही एक अकेला ऐसा मसाला है, जिसे उगाने के लिए लाइसेंस लिया जाता है. भारत में तो अफीम उगाने के लिए शासन से लाइसेंस लेना होता है। वैसे कुछ देशों में अफीम को अवैध तरीके से उगाया जाता है। डोडे से निकालकर इन बीजों को प्रोसेस कर सुखा लिया जाता है और वह खसखस बन जाता है।
कुछ इस तरह उगाई जा रही थी अफीम पुलिस की मुंह जुबानी
सारणी पुलिस ने दो स्थानों पर अफीम की खेती पकड़ी गई है, मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। उन्हें पकड़ने के लिए कई पुलिस टीमें दिन रात जुटी हुई है।
थाना – सारणी में अपराध क्रमांक*- 100/25
*धारा* – 18(3),25 NDPS Act
*आरोपी*छगन उइके,
पप्पू चक्रवान, प्रियांशु चक्रवान निवासी ग्राम धसेड़
आरोपियों द्वारा अवैध अफीम की खेती करते पाए जाना एवं अफीम के पौधे कुल वजन 1703.6 किलो कीमत 30लाख रूपए जप्त की गई
प्रियांशू चक्रवान मुख्य आरोपी हैं।जिसे पकड़ लिया है। छगन उईके का खेत है।जिसे भी पकड़ लिया है।अभी पप्पू फरार है।
आरोपियों को पकड़ने में जुटी पुलिस टीमें
एसपी निश्चल एन झारिया ने बताया कि जिले में अफीम खेती के दो मामले सामने आने के बाद मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। पुलिस को आशंका है कि जिले में और भी जगहों पर ऐसी खेती हो रही है। पुलिस की सक्रियता के बाद कई स्थानों पर लगी अफीम की फसल को नष्ट कर सबूत मिटाए जा चुके हैं।
अफीम के पौधे का विवरण
अफीम पोस्ता एक लंबे, भूरे-हरे रंग के तने के रूप में उगता है जो 1 मीटर से अधिक ऊंचाई तक पहुंच सकता है। बड़े पत्ते भूरे-हरे रंग के होते हैं, छोटे बालों से ढके होते हैं, और तने के ऊपर बारी-बारी से बढ़ते हैं, जिनकी लंबाई लगभग 30 सेमी तक होती है।
फूल लाल, सफ़ेद या बैंगनी हो सकते हैं, कभी-कभी पंखुड़ियों के बीच में गहरे या हल्के रंग के धब्बे होते हैं, और 3 से 10 सेमी तक बढ़ते हैं। परागण होने पर, अफीम पोस्ता फल एक सपाट, धारीदार टोपी के साथ एक ग्रे-हरा गोलाकार कैप्सूल होता है। सूखने पर ये काले-भूरे रंग के हो जाते हैं, और इनमें सैकड़ों या हज़ारों छोटे काले, भूरे या भूरे रंग के बीज होते हैं।
अफीम पोस्त का विशिष्ट नाम, सोम्निफेरम, का अर्थ है ‘नींद लाने वाला’, जो अफीम की शामक क्षमता के संदर्भ में है।
अफीम को पोस्त के पौधे के बीज को खुरचकर, फिर उत्पन्न सफेद लेटेक्स को एकत्र करके एकत्र किया जाता है।
अफ़ीम (Opium ; वैज्ञानिक नाम : lachryma papaveris) अफ़ीम के पौधे पैपेवर सोमनिफेरम के ‘दूध’ (latex) को सुखा कर बनाया गया पदार्थ है,
जिसके सेवन से मादकता आती है। इसका सेवन करने वाले को अन्य बातों के अलावा तेज नींद आती है। अफीम में 12% तक मार्फिन (morphine) पायी जाती है जिसको प्रसंस्कृत (प्रॉसेस) करके हीरोइन (heroin) नामक मादक द्रब्य (ड्रग) तैयार किया जाता है। अफीम का दूध निकालने के लिये उसके कच्चे, अपक्व ‘फल’ में तीन से पांच तक (एकसाथ ) चीरें लगाए जाते हैं ; इसका दूध निकलने लगता है, जो निकल कर सूख जाता है। यही दूध सूख कर गाढ़ा होने पर अफ़ीम कहलाता है। यह लचिला (sticky) होता है।
अवैध नशीली दवाओं के व्यापार के लिए, अफीम लेटेक्स से मॉर्फिन निकाला जाता है, जिससे थोक वज़न 88% कम हो जाता है। फिर इसे हेरोइन में बदल दिया जाता है, जो लगभग दुगनी शक्तिशाली होती है,
और एक समान कारक द्वारा मूल्य में वृद्धि करती है। कम वज़न और थोक में तस्करी करना आसान हो जाता है।
Comments are closed.