मोहन-हेमंत की चाय ने गरम सियासत को दी ठंडक, एक गाड़ी में भाजपा दफ्तर पहुंचे दोनों नेता
भोपाल, 12 सितंबर ।। मध्यप्रदेश की सियासत में पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच कथित अनबन और सत्ता-संगठन में बदलाव की चल रही चर्चाओं के बीच शुक्रवार को अचानक तस्वीर बदली नजर आई। मुख्यमंत्री मोहन यादव सुबह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के भोपाल स्थित निवास पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब एक घंटे तक ‘चाय पर चर्चा’ हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री स्वयं खंडेलवाल को अपनी गाड़ी में लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे।
दोनों नेताओं का एक साथ इस तरह सामने आना राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा का विषय बन गया। खास बात यह रही कि जिस वक्त प्रदेश भाजपा में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, संगठन में फेरबदल और नेताओं के बीच समीकरणों को लेकर तरह-तरह की अटकलें चल रही थीं, उसी दौरान मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने साथ आकर इन चर्चाओं को एक तरह से राजनीतिक जवाब देने की कोशिश की।
प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचने के बाद दोनों नेताओं ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान जब मीडिया ने दोनों के बीच मतभेद और कथित विवाद की खबरों को लेकर सवाल किया तो मुख्यमंत्री मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल मुस्कुरा दिए। दोनों नेताओं ने ऐसी चर्चाओं को अफवाह बताया और अपने बीच अच्छे संबंध होने की बात कही।
राजनीतिक रूप से इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री का स्वयं प्रदेश अध्यक्ष के घर जाना और वहां से उन्हें अपनी गाड़ी में लेकर भाजपा कार्यालय पहुंचना रहा। इससे पहले दोनों नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी कम होने को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर चर्चाएं तेज हो गई थीं। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इसे सत्ता और संगठन के बीच किसी संभावित दूरी से जोड़कर देखा जा रहा था।
इन चर्चाओं को उस समय और बल मिला था, जब मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के दिल्ली दौरों के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकातों की खबरें सामने आई थीं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकातों के बाद प्रदेश भाजपा के भीतर संभावित बदलावों को लेकर कयास लगाए जाने लगे थे।
इसी बीच शुक्रवार की सुबह मुख्यमंत्री का हेमंत खंडेलवाल के आवास पहुंचना अचानक हुए राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा गया। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत को लेकर हालांकि कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम माना गया। चर्चा है कि सत्ता-संगठन के तालमेल, मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव और संगठन के कुछ पदों पर नियुक्तियों सहित कई विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
मध्यप्रदेश भाजपा में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियों को लेकर अटकलें चल रही हैं। इसी के साथ प्रदेश मीडिया प्रभारी की नियुक्ति को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा है। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की बंद कमरे में हुई मुलाकात को इन संभावित फैसलों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया।
दोनों नेताओं का एक साथ भाजपा कार्यालय पहुंचना और फिर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करना भी अपने आप में राजनीतिक संदेश माना गया। पिछले कुछ दिनों की चर्चाओं के विपरीत मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने न केवल साथ बैठकर मीडिया से बातचीत की, बल्कि मतभेद से जुड़े सवालों का सामना भी एक साथ किया। दोनों की सहज बातचीत और मुस्कुराहट ने भी राजनीतिक अटकलों को विराम देने का संदेश दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेमंत खंडेलवाल ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी प्रदेश के 71 हजार से अधिक बूथों पर लाभार्थी परिवारों तक पहुंचेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान शाम सात बजे प्रत्येक बूथ के लाभार्थी परिवारों के घर ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर विकसित भारत-2047 का संकल्प लिया जाएगा।
अभियान के तहत रक्तदान, स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, प्रदर्शनियां, संवाद और जनसंपर्क सहित 12 प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा इसे सेवा और जनसंपर्क से जोड़कर व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में है।
उधर, प्रदेश की राजनीति में दिल्ली से भोपाल तक नेताओं की सक्रियता भी बढ़ी हुई है। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए खजुराहो के विभिन्न विकास कार्यों पर चर्चा की जानकारी दी।
इससे एक दिन पहले उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल की राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकातें भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी थीं। दोनों उपमुख्यमंत्रियों के लोक भवन पहुंचने को हालांकि आधिकारिक तौर पर अन्य कार्यक्रमों से जोड़कर देखा गया, लेकिन एक ही दिन में हुई अलग-अलग मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को जरूर हवा दी।
ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मुलाकात ने फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। बंद कमरे की चाय से लेकर एक गाड़ी में भाजपा कार्यालय पहुंचने तक की तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर किसी भी तरह की दूरी की धारणा को खत्म करना चाहते हैं।
हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होना है। इसलिए शुक्रवार की मुलाकात से तत्काल किसी बड़े राजनीतिक निर्णय का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। लेकिन इतना जरूर है कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का साथ आना मध्यप्रदेश भाजपा की अंदरूनी सियासत में चल रही चर्चाओं के बीच एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश लेकर आया है—कम से कम सार्वजनिक मंच पर सत्ता और संगठन के बीच तालमेल को लेकर कोई दरार दिखाई नहीं दे रही है।
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