ब्रम्हांड से जोड़ दिया बैतूल का इतिहास सराहनीय: हेमन्त खण्डेलवाल
मैं बैतूल हूँ कि मंच पर दी गई जीवंत प्रस्तुति
राजा जैतपाल, तात्याटोपे, से लेकर राजा ईल की कहानी से रूबरू हुए दर्शक
बैतूल। जिले के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जिले के इतिहास की परिकल्पना युवाओं के सहयोग से मंच पर नजर आई। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा मैं बैतूल हूं… का मंचन बैतूल के उत्कृष्ट कलाकारों ने जीवंत कर दिखाया। कार्यक्रम में बतौर अतिथि बैतूल विधायक एवं कार्यक्रम के संरक्षक हेमन्त खण्डेलवाल, नपा अध्यक्ष पार्वती बाई बारस्कर, भाजपा जिला अध्यक्ष सुधाकर पवार समेत बड़ी संख्या में दर्शक गण शामिल हुए। इस अवसर पर युवा वर्ग द्वारा किये गए इस प्रयास की विधायक हेमन्त खण्डेलवाल ने खुलकर सराहना कर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि, मैं बैतूल हूं के शीर्षक को कलाकारों ने जीवंत कर दिखाया। जिस तरह ब्रम्हांड से बैतूल का इतिहास जोड़ा गया, यह प्रयास काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि यह तो एक छोटा सा प्रयास है। कोशिश की जाए तो यह कार्यक्रम बड़े रूप में आयोजित किया जा सकता है। जिसमें हजारों की संख्या में जिलेवासी शामिल होकर जिले के इतिहास से रूबरू हो सकते हैं।
– राजा जैतपाल से लेकर राजा ईल और स्वतंत्रता सैनानी मंच पर आए नजर
दरअसल मैं बैतूल हूं ..के मंचन की पटकथा और मंचन उत्कृष्ट कलाकार शिरीष ध्वनि और सूर्यदीप त्रिवेदी द्वारा तैयार की गई थी। ग्रुप में शामिल कलाकारों ने राजा जैतपाल से लेकर खण्डारा रियासत के राजा ईल, तात्या टोपे का अभिनय साकार किया। खास बात ये है कि,नाटक के मंचन में अंग्रेजों का शाषन काल तक शामिल किया गया था। अंग्रेजो ने जिस तरह जिले में अपनी आमद दी और देश को आजादी दिलाने में जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भूमिका क्या रही इसे कलाकारों ने अपने अभिनय के रूप में जब प्रस्तुत किया तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम में आदिवासी नृत्यों की बेहतरीन झलक भी नजर आई। आदिवासी समुदाय के युवाओ ने कोरकू और गोंधळ नृत्य की प्रस्तुति देकर जमकर तालियां बटोरी, विधायक हेमन्त खण्डेलवाल ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका उत्साह वर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम के सूत्रधार आदर्श सोनकपुरिया एवं संकल्प सिंह चौहान ने अतिथियों समेत सभी दर्शकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सताक्षी गौर द्वारा किया गया।
यह भी पढ़ें
Comments are closed.