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शराब ठेकेदारों ने मध्य प्रदेश सरकार को ₹756 करोड़ का नुकसान पहुंचाया: CAG रिपोर्ट में खुलासा

By,वामन पोटे

शराब ठेकेदारों ने मध्य प्रदेश सरकार को ₹756 करोड़ का नुकसान पहुंचाया: CAG रिपोर्ट में खुलासा, इस पैसे से बन सकते थे 5 लाख प्रधानमंत्री आवास और 1500 किलोमीटर सड़कें

भोपाल।।।

31 मार्च, 2022 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए कैग रिपोर्ट 31 जुलाई को विधानसभा में पेश की गई।

मध्य प्रदेश सरकार को शराब ठेकेदारों ने 756 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाया है और तीन साल बाद भी सरकार यह रकम वसूल नहीं कर पाई है। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट में हुआ है, जिसे 31 जुलाई को विधानसभा में पेश किया गया।
यह रिपोर्ट फरवरी और अक्टूबर 2022 के बीच 52 में से 26 ज़िला आबकारी कार्यालयों और आबकारी आयुक्त कार्यालय में किए गए निरीक्षणों के बाद तैयार की गई है। इसमें 2,569 मामलों में ₹756 करोड़ के नुकसान का ज़िक्र है और राज्य की शराब नीति पर गंभीर चिंताएँ भी जताई गई हैं।
कैग के निष्कर्षों के बाद,
विश्लेषण किया गया कि इस 756 करोड़ रुपये का बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जा सकता था। रिपोर्ट में पाया गया कि सरकार इस राशि से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पाँच लाख गरीब परिवारों के लिए घर बनवा सकती थी या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 1,500 किलोमीटर सड़कें बनवा सकती थी।
यह समझने के लिए आगेपढ़ें कि शराब ठेकेदारों ने किस प्रकार सार्वजनिक धन की हेराफेरी की, सरकार धन की वसूली करने में क्यों विफल रही, तथा इतनी बड़ी राशि से क्या विकास कार्य किए जा सकते थे।
6 प्वाइंट्स में जानें कैसे हुआ 756 करोड़ का नुकसान
1. नई शराब नीति 4 महीने में रद्द, 471 करोड़ का नुकसान
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-21 की शराब नीति 1 अप्रैल से लागू हुई थी, लेकिन चार महीने बाद अगस्त में इसे रद्द कर दिया गया। इससे सरकार को 471.38 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई अभी तक नहीं हो पाई है। दरअसल, सरकार ने 16 जिलों के मौजूदा रिटेल लाइसेंस रद्द कर दिए थे और 20 ग्रुप लाइसेंस जारी किए थे।
कैग ने पाया कि इस दौरान, 20 में से 11 लाइसेंसधारियों ने शराब नीति रद्द करने और अपनी सुरक्षा राशि वापस पाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कोविड महामारी प्रतिबंधों के कारण शराब की दुकानें चलाने और लाइसेंस शुल्क का भुगतान करने में अपनी असमर्थता का हवाला दिया।
लाइसेंस रद्द होने के बाद, उनकी 241.50 करोड़ रुपये की राशि की वसूली 31 मार्च, 2023 तक लंबित रही। आबकारी विभाग ने मई 2023 में अपने जवाब में कहा कि कोविड प्रतिबंधों के कारण खुदरा शराब की दुकानें लगातार चालू नहीं रह सकतीं। कई ठेकेदारों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए और विभाग ने इन दुकानों का संचालन शुरू कर दिया।
कैग ने विभाग के इस जवाब को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि जिन 18 जिलों में समूह लाइसेंसिंग के स्थान पर खुदरा लाइसेंसिंग प्रणाली लागू की गई थी, वहां शराब ठेकेदारों ने पूरी राशि जमा करा दी थी।
2. 11 ठेकेदारों से 232 करोड़ रुपये नहीं वसूले गए
2020-21 में सरकार ने राज्य के 52 जिलों में शराब बेचने के लिए 329 लाइसेंस जारी किए। इससे 10,729 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की उम्मीद थी। 38 ठेकेदारों ने शराब की दुकानें चलाने से इनकार कर दिया। इनसे सरकार के खाते में 1,605 करोड़ रुपये से ज़्यादा जमा होने थे।
आबकारी विभाग ने इन दुकानों का दोबारा टेंडर निकाला, लेकिन 38 ठेकेदारों से 269 करोड़ रुपये वसूले जाने थे, जो सरकार मार्च 2024 तक वसूल नहीं कर सकी। इनमें से सिर्फ़ 11 ठेकेदारों से 232 करोड़ रुपये वसूले जाने थे, जबकि 17 ठेकेदारों से 37 करोड़ रुपये वसूले जाने थे। इनका मामला अदालत में लंबित था।
3. लाइसेंस जारी करने से पहले कोई वित्तीय मूल्यांकन नहीं किया गया

कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बोली प्रक्रिया के दौरान बोलीदाताओं की वित्तीय स्थिति का आकलन करने का विभाग के पास कोई प्रावधान नहीं था। धार कलेक्टर ने जमानत राशि जमा न करने पर बदनावर और गंधवानी समूह के लाइसेंस रद्द कर दिए थे।
हालांकि, जिला लाइसेंसधारी के नाम पर कोई चल-अचल संपत्ति न होने के कारण समूह से कोई वसूली नहीं हो सकी। इससे सरकार को 9 करोड़ 58 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
4. 3.63 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि वापस की गई।
रीवा जिले की सभी 71 दुकानों का अनुबंध बिलासपुर समूह के गोपाल एसोसिएट्स को दिया गया था, जिसके 10 साझेदार थे। एसोसिएट्स ने सुरक्षा राशि (51.38 करोड़ रुपये) और अन्य दस्तावेज जमा नहीं किए। इस कारण अनुबंध रद्द कर दिया गया। गोपाल एसोसिएट्स के एक साझेदार निकुंज शिवहरे (मेसर्स वाइन ट्रेडर्स ग्वालियर) थे।
मेसर्स वाइन ट्रेडर्स ने मुरैना में एक ठेका लिया था। इसके लिए उन्होंने 3.63 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा की थी। रीवा कलेक्टर ने मुरैना कलेक्टर को शिवहरे से यह राशि जब्त करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन मुरैना जिला आबकारी अधिकारी ने राशि जब्त करने के बजाय, उसे ठेकेदार की बकाया राशि में समायोजित कर दिया।
5. स्टॉक निरीक्षण के दौरान 1.69 करोड़ रुपये की अनियमितता: जिला आबकारी अधिकारियों ने तीन जिलों – बैतूल, सिंगरौली और रीवा – की 6 खुदरा दुकानों से विदेशी और देशी शराब जब्त की। पंचनामा के अनुसार, दुकानों में शराब का कुल स्टॉक 1 लाख 05 हज़ार 268 था। जाँच अधिकारियों ने अपने स्टॉक रजिस्टर में केवल 14,042 बोतलें दर्ज कीं, यानी 91,226 बोतलें दर्ज नहीं की गईं। बिना दर्ज की गई बोतलों की कीमत 1 करोड़ 69 लाख रुपये है।
6. बैंक गारंटी दूसरे के नाम, फिर भी ठेका दे दिया गया।
ठेका नियम यह है कि किसी ठेकेदार की बैंक गारंटी तभी स्वीकार की जाएगी जब वह उसके नाम या कंपनी के नाम पर जारी की गई हो। जांच में पता चला कि 19 ठेकेदारों से ली गई 18.39 करोड़ की बैंक गारंटी में नाम तक नहीं थे।
रिपोर्ट में, कैग ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि ठेकेदार रवींद्र सिंह के नाम पर 11.12 लाख रुपये की बैंक गारंटी (संख्या 2990ILG000818) जमा की गई थी। बैंक में सत्यापन करने पर पता चला कि यह गारंटी बद्री प्रसाद जायसवाल के नाम पर जारी की गई थी।
₹756 करोड़ से क्या किया जा सकता है? 1. 1,500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण:
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 1,500 किलोमीटर सड़कें बनाई जा सकती हैं। मध्य प्रदेश में, 1 किलोमीटर सड़क बनाने की लागत ₹50-55 लाख है। वैकल्पिक रूप से, 750 किलोमीटर शहरी सड़कें (सीमेंट/तार) बनाई जा सकती हैं, जिनकी लागत ₹1 करोड़ प्रति किलोमीटर होगी।
2. 7-8 आधुनिक ज़िला अस्पताल:
आधुनिक सुविधाओं वाले प्रत्येक अस्पताल की लागत लगभग ₹100 करोड़ है। ₹756 करोड़ से ऐसे 7-8 अस्पताल बनाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, 7,500 जन औषधि केंद्र (प्रत्येक ₹10 लाख) भी स्थापित किए जा सकते हैं।
3. 15,000 स्मार्ट क्लासरूम:
₹756 करोड़ से 750 नए स्कूलों (प्रत्येक ₹1 करोड़) का निर्माण या पुराने स्कूलों का नवीनीकरण किया जा सकता है। वैकल्पिक रूप से, सरकारी स्कूलों में 15,000 स्मार्ट क्लासरूम (प्रत्येक ₹5 लाख) स्थापित किए जा सकते हैं।
4. गरीबों के लिए 5 लाख पक्के घर: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत, प्रत्येक घर की लागत ₹1.5 लाख है। 5 लाख से ज़्यादा घर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। साथ ही, 500 गाँवों में नल जल योजनाएँ (प्रति गाँव ₹1.5 करोड़) लागू की जा सकती हैं।
5. खनन घोटाला: ₹711 करोड़ का नुकसान,
CAG रिपोर्ट (2019–22): 45 ठेकेदारों ने बजरी, रेत, संगमरमर और डोलोमाइट के खनन में निर्धारित सीमा से ज़्यादा खनन किया, जिससे ₹630 करोड़ का नुकसान हुआ। कोई रॉयल्टी या जुर्माना नहीं लगाया गया और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचित भी नहीं किया गया।
6. बिना अनुमति के खनन:
छिंदवाड़ा, सागर और सीहोर में 10 ठेकेदारों ने अवैध रूप से खनन किया, जिससे 81 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ
साभार :दैनिक भास्कर

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