होलकर रियासत जैसी होगी कैबिनेट, पटिए-गद्दों पर बैठेंगे सीएम-मंत्री:इंदौर के राजवाड़ा में आजादी के बाद पहली बार बैठक; 1945 में आखिरी बार सजा था दरबार
By,वामन पोटे
होलकर रियासत जैसी होगी कैबिनेट, पटिए-गद्दों पर बैठेंगे सीएम-मंत्री:इंदौर के राजवाड़ा में आजादी के बाद पहली बार बैठक; 1945 में आखिरी बार सजा था दरबार
इंदौर।।1945 में राजवाड़ा में अंतिम बार होलकर राजा का दरबार सजा था। उसके बाद से कल पहली बार यहां कैबिनेट बैठक होने जा रही है।
मध्यप्रदेश में आजादी के बाद पहली बार होलकर रियासत जैसे कैबिनेट बैठक होने जा रही है। इंदौर के राजवाड़ा में दरबार हॉल को होलकर शासनकाल के दरबार जैसे ही सजाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री पटिए और गद्दों पर बैठेंगे। यहां सरकार महत्वपूर्ण फैसले लेगी।
बता दें कि इसके पहले 1945 में राजवाड़ा दरबार हाल (गणेश हॉल) में होलकर राजाओं का अंतिम बार दरबार सजा था। पहले इसी हाल में आयोजित दरबार में होलकर सरकार के निर्णय लिए जाते थे।
तब दरबार में मंत्री पटिए और गद्दों पर बैठते थे, लोट रखे जाते थे जिन पर सिंह की आकृति उकेरी होती थी, बिल्कुल वैसा ही नजारा अब एक बार फिर गणेश हॉल में देखने को मिलेगा।
सीएम और मंत्री शाम को इंदौर पहुंचेंगे
आज शाम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्री इंदौर आएंगे। मुख्यमंत्री शाम 6.30 बजे इंदौर पहुंचेंगे और राजेंद्र नगर स्थित लता मंगेशकर सभागृह जाएंगे। वहां मां अहिल्या के जीवन प्रसंग पर आधारित नाट्य मंचन देखेंगे। फिर रात को सराफा चौपाटी जाकर व्यंजनों का लुत्फ उठाएंगे।
इंदौर के राजवाड़ा का इतिहास और यह क्यों हैं खास…
राजवाड़ा का निर्माण होलकर रियासत के संस्थापक मल्हार राव होलकर ने अपने अंतिम दिनों में शुरू करवाया था, लेकिन इसका श्रेय मल्हार राव होलकर द्वितीय को जाता है। इस इमारत में तीन बार 1801, 1908 और 1984 में आग लगी, लेकिन इन सबके बावजूद राजवाड़ा आज भी खड़ा हुआ है।
राजवाड़ा महल पर्यटन के लिहाज से इंदौर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यह होलकर राजवंश के शासकों का ऐतिहासिक महल है। इसका निर्माण 200 साल पहले हुआ था। महल की वास्तुकला, फ्रेंच, मराठा और मुगल शैली के कई रूपों व वास्तु शैलियों का मिश्रण है।
महल का प्रवेश द्वार सुंदर और भव्य है। बड़ी-बड़ी खिड़कियां, बालकनी और गलियारे, होलकर शासकों और उनकी भव्यता का प्रमाण है। यह देश का एकमात्र ऐसा पैलेस है, जिसका द्वार सात मंजिला है।
तीन बार आग की चपेट में आया राजवाड़ा
पहली बार 1801 में महाराजा यशवंतराव होलकर ने उज्जैन पर आक्रमण किया था। जवाबी हमले में सरजे राव घाटगे ने इंदौर पर आक्रमण किया और इंदौर को लूटा। राजवाड़ा की ऊपरी दो-तीन मंजिलों में आग लगाई गई।
इसके बाद होलकर रियासत के दीवान तात्या जोग ने 1811 में एक बार फिर इसका निर्माण कराया। दूसरी बार 1908 में राजवाड़ा की लेफ्ट विंग में आग लगी, यह आग क्यों लगी थी, इसका पुख्ता कारण ज्ञात नहीं है। वहीं, तीसरी बार 1984 के दंगों में राजवाड़ा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा था। इसके दो शीश महल जलकर खाक हो गए थे।
1747 में मल्हार राव प्रथम ने राजवाड़ा की नींव रखी
मल्हार राव होलकर को 3 अक्टूबर 1730 को मराठों ने उत्तर भारत के सैनिक अभियानों का नेतृत्व सौंपा। सैनिक अभियानों की व्यस्तता के कारण उन्होंने स्थायी निवास के लिए छत्रपति शाहू से निवेदन किया। इस निवेदन पर पेशवा बाजीराव ने 1734 ई. में मल्हार राव की पत्नी गौतमा बाई होलकर के नाम खासगी जागीर तैयार करवाई, जिसमें इंदौर भी था। सन 1747 में मल्हार राव प्रथम ने राजवाड़ा की नींव रखी थी।
6174 वर्गमीटर जमीन पर संगमरमर, लकड़ी, ईंट, मिट्टी और गारे की मदद से फ्रेंच शैली का उपयोग करते हुए इस भव्य निर्माण की नींव डाली गई। 1761 में मल्हार राव प्रथम अहमद शाह अब्दाली से जंग में हार गए। सदमे से उनकी तबीयत खराब रहने लगी। राजवाड़ा का निर्माण बीच में ही रुक गया। सन 1765 में उनका निधन हो गया।
इसके बाद मल्हार राव द्वितीय ने इसका काम शुरू कराया, जिसके बाद होलकरों का यह राजवाड़ा बनकर तैयार हुआ। राजवाड़ा इंदौर में 1766 से 1834 के बीच बनकर तैयार हुआ था। इस सात मंजिला भवन में नीचे की तीन मंजिलें संगमरमर की बनी थीं। ऊपरी चार मंजिलों को सागौन की लकड़ी से बनाया गया था।
918 फुट लंबी और 232 फुट चौड़ी इस इमारत का प्रवेश द्वार 6.70 मीटर ऊंचा है, जिसकी संरचना हिंदू शैली के महलों की तरह है। होलकरों का दरबार हॉल, जिसे गणेश हॉल कहा जाता है, वह फ्रेंच शैली में बनाया गया है।
गणेश हॉल में होना है कैबिनेट बैठक
वर्तमान में अवशिष्ट गणेश हॉल, जो होलकरों का दरबार हॉल माना जाता है, क्लासिकल फ्रेंच शैली में बना हुआ है। इस भवन के पूर्वी भाग को छोड़कर अन्य हिस्सों में कई कमरे बनाए गए थे। कई कक्षों में सुंदर भित्ति चित्र बनाए गए थे, जो नाथद्वारा, कोटा, बूंदी और मालवा शैली के संयोजन से तैयार किए गए थे।
राजवाड़ा महल शहर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। लकड़ी और लोहे से निर्मित राजसी संरचना से बना महल का प्रवेश द्वार यहां आने वाले हर पर्यटक का स्वागत करता है। यह पूरा महल लकड़ी और पत्थर से निर्मित है। बड़ी-बड़ी खिड़कियां, बालकनी और गलियारे होलकर शासकों और उनकी भव्यता का प्रमाण हैं।
देश का एकमात्र पैलेस, जिसका दरवाजा सात मंजिला
एक पुस्तक राजवाड़ा का अस्तित्व 1766 में बताती है और दूसरी 1809 में। इसके निर्माण का एक और संदर्भ 1811 से 1833-34 तक का है। शहर के मध्य बसा यह विशाल सात मंजिला महल 4 लाख रुपए में बनवाया गया था। इसकी लंबाई 318 फुट और चौड़ाई 232 फुट है।
होलकर रियासत के संस्थापक मल्हार राव होलकर ने अपने अंतिम दिनों में राजवाड़ा बनवाने की शुरुआत की थी। हालांकि, इसे बनवाने का श्रेय मल्हार राव होलकर द्वितीय को जाता है। यह देश का पहला ऐसा पैलेस है, जिसका दरवाजा सात मंजिला है।
1975 में होलकर ने बेच दिया था राजवाड़ा
इंदौर पुरातत्व विभाग के अधिकारी प्रकाश ने बताया की राजवाड़ा को साल 1975 में होलकर राजवंश ने बेच दिया था। किसे बेचा गया इसकी जानकारी नहीं है लेकिन शायद कासलीवाल परिवार को यह बेचा गया था।
राजवाड़ा बेचने पर इंदौर की राजवाड़ा बचाओ समिति ने आंदोलन किया था। जिसके बाद तत्कालीन सीएम ने मामले को संज्ञान में लेकर राजवाड़ा का अधिग्रहण करके इसे राज्य शासन की धरोहर में शामिल किया था।
2018 में स्मार्ट सिटी ने किया रिनोवेशन
इंदौर की धरोहर राजवाड़ा को पिछले साल पर्यटकों के लिए खोला गया था। स्मार्ट सिटी कंपनी के रिनोवेशन का काम खत्म करने के बाद 13 फरवरी 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका लोकार्पण किया था।
राजवाड़ा के रिनोवेशन का
काम 26 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था, जो 2018 में शुरू हुआ था। इसमें 1.5 करोड़ रुपए की लागत से लाइट एंड साउंड शो तैयार किया गया है। 500 घनमीटर लकड़ी से इसकी खूबसूरती को दोबारा निखारा गया है। राजवाड़ा के रिनोवेशन में 6 राज्यों के कलाकारों ने नवीनीकरण कार्य किया है।
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