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एमपी में मानसून की एंट्री 15-16 जून को, केरल पहुंचा:मंडला-बालाघाट समेत 9 जिलों से सबसे पहले दस्तक; ग्वालियर-चंबल संभाग में देर लगेगी

By,वामन पोटे

एमपी में मानसून की एंट्री 15-16 जून को, केरल पहुंचा:मंडला-बालाघाट समेत 9 जिलों से सबसे पहले दस्तक; ग्वालियर-चंबल संभाग में देर लगेगी

भोपाल।।देश में मानसून ने दस्तक दे दी है। शनिवार को मानसून केरल पहुंच गया। यह अपने तय समय से 8 दिन पहले पहुंचा है। मध्यप्रदेश में भी मानसून 15-16 जून तक एंटर हो सकता है। इससे पहले प्री मानसून की एक्टिविटी जारी रहेगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के दक्षिणी हिस्से यानी मंडला, सिवनी, डिंडौरी, बालाघाट, अनूपपुर, बुरहानपुर, पांढुर्णा, बैतूल, बड़वानी के रास्ते से मानसून दस्तक देगा। ग्वालियर-चंबल में सबसे लेट 25 जून तक पहुंचेगा। भोपाल, इंदौर में यह 20 से 22 जून के बीच आ सकता है।
बता दें कि प्रदेश में मानसून के आमद की सामान्य तारीख 15 जून है। हालांकि, पिछले कुछ सालों से यह 18 से 22 जून के बीच ही पहुंच रहा है। पिछले साल यानी 2024 में मानसून की 21 जून को एंट्री हुई थी। यह 6 दिन देरी से प्रदेश में पहुंचा था।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिले में प्रवेश किया था। इस बार भी इन्हीं जिलों से मानसून के आने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून ने 8 दिन पहले ही देश में दस्तक दी है।
इससे पहले 2009 को भी मानसून 23 मई को पहुंच गया था। फिलहाल मानसून के आगे बढ़ने की स्थिति ठीक है। मध्यप्रदेश में इस बार भी समय से पहले या समय पर इसके दस्तक देने की स्थिति बन रही है।

मौसम विभाग ने 15 जून को मानसून के मध्यप्रदेश में पहुंचने की संभावना जताई है।

15 जून तक प्रदेश में मानसून आने का अनुमान
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि मानसून अभी केरल पहुंचा है। अब यह कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र में पहुंचेगा। फिलहाल तो मानसून की स्थिति ठीक है, पर आगे जाकर रफ्तार धीमी भी हो सकती है। हवा की गति और प्रेशर के बाद ही मानसून की सही स्थिति पता चलती है।
कई बार मानसून अटक भी जाता है। इसलिए अब तक का अनुमान यही है कि 15 जून के आसपास मानसून प्रदेश में आएगा। यदि मानसून की गति बेहतर रही तो यह पहले भी आ सकता है। मई के आखिरी में स्थिति और भी क्लियर हो जाएगी।

ऐसे समझें मानसून की एंट्री 15-16 जून:
मंडला, सिवनी, डिंडौरी, बालाघाट, अनूपपुर, बुरहानपुर, पांढुर्णा, बैतूल, बड़वानी, खरगोन जिलों में पहुंच सकता है। 20 से 22 जून: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर संभाग को कवर कर लेगा। 22 से 23 जून: सागर, रीवा, शहडोल संभाग में मानसून दस्तक दे सकता है। 25 जून: ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के नीमच जिले में मानसून के पहुंचने का अनुमान है।

इस बार बारिश के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद
प्रदेश में इस बार मानसून के सामान्य से बेहतर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अनुमान के मुताबिक 104 से 106% यानी औसत 38-39 इंच बारिश हो सकती है। जबलपुर-शहडोल संभाग में सबसे ज्यादा पानी गिरेगा। ग्वालियर, चंबल, इंदौर, उज्जैन और भोपाल संभाग में भी कोटा फुल हो सकता है।
साल 2023 में प्रदेश के 25 से ज्यादा जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, लेकिन 2024 में भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर समेत 44 जिलों में कोटे से ज्यादा बारिश हुई थी। नतीजा ये रहा है कि सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 2 क्विंटल तक बढ़ गया था।
वहीं, गेहूं-चने के लिए भी पानी पर्याप्त गिरा था। मई के आखिरी में मौसम विभाग एक और अपडेट जारी करेगा। इसमें बारिश को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी। अप्रैल में हुए मानसून फोरकास्ट में कहा था कि जून से सितंबर तक मानसून सामान्य से बेहतर रहेगा।

इन जिलों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद
मौसम विभाग ने प्रदेश के ज्यादातर जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने का अनुमान जताया है। जबलपुर, शहडोल संभाग में सबसे अधिक पानी गिरने की उम्मीद है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग के ज्यादातर जिलों में डेढ़ सौ फीसदी तक पानी गिर सकता है। उत्तरप्रदेश बॉर्डर से लगे कुछ जिलों में सामान्य बारिश के भी आसार हैं।

2017 में सबसे कम, 2019 में जमकर बारिश हुई
पिछले 10 साल के बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2017 में सबसे कम बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। इसके मुकाबले औसत 29.9 इंच बारिश हुई थी। साल 2015 में 32.4 इंच, 2018 में 34.3 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
सबसे ज्यादा पानी साल 2019 में 53 इंच हुई थी। 2021 और 2023 में सामान्य से थोड़ी ही कम बारिश हुई थी। इस तरह कह सकते हैं कि पिछले 6 साल से प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है। अगर मौसम विभाग का इस साल का अनुमान सटीक बैठता है तो लगातार 7वें साल प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी।

मध्य प्रदेश में 949 एमएम एवरेज बारिश
मध्यप्रदेश की सामान्य बारिश 949mm यानी 37.3 इंच है। मानसूनी सीजन के दौरान (जून से सितंबर के बीच) इतनी बारिश होती है। पिछले साल की बात करें, तो प्रदेश में एवरेज 37.22 इंच बारिश हुई थी, जो सामान्य के बराबर ही थी। भोपाल समेत कई जिलों में तो सामान्य से अधिक बारिश हुई थी। इस कारण बाढ़ के हालात भी बन गए थे।

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