रविन्द्र देशमुख सुसाइड केस, भाजपा नेता समेत 3 को राहत:हाईकोर्ट ने कहा- आत्महत्या के उकसाने का कोई केस नहीं बनता; दस को बनाया था आरोपी
By,वामन पोटे
रविन्द्र देशमुख सुसाइड केस, भाजपा नेता समेत 3 को राहत:हाईकोर्ट ने कहा- आत्महत्या के उकसाने का कोई केस नहीं बनता; दस को बनाया था आरोपी
बैतूल।।बैतूल के सारणी में बहुचर्चित रविन्द्र देशमुख सुसाइड केस में जबलपुर हाईकोर्ट ने तीन भाजपा नेताओं को राहत दी है। कोर्ट ने रंजीत सिंह, प्रकाश देशमुख और दीपक देशमुख को आरोपमुक्त करते हुए कहा कि उनके खिलाफ आत्महत्या के दुष्प्रेरण का कोई मामला नहीं बनता। पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में इस मामले में दस लोगों को आरोपी बनाया था।
कोई व्यक्ति यह नहीं चाहेगा कि उसका कर्जदार मर जाए
अधिवक्ता अजय सिंह चौहान ने बताया कि कोर्ट ने मामले में आरोप गलत तरीके से तय किए जाने की बात कही है। कोर्ट ने रंजीत सिंह, प्रकाश शिवहरे और दीपक शिवहरे को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 108 सहपठित 3(5) के तहत आरोपमुक्त कर दिया है। ती
नों आरोपियों को बैतूल के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित एसटी क्रमांक 07/2025 से भी मुक्त कर दिया गया है। कोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकृत कर उनका निपटारा कर दिया।
जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह दर्शाता हो कि आरोपियों ने मृतक को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। कोर्ट ने कहा कि अगर सुसाइड नोट को सच माना जाए, तो भी कोई व्यक्ति यह नहीं चाहेगा कि उसका कर्जदार मर जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतक ने 7 अक्टूबर 2024 को आत्महत्या की, जबकि अंतिम लेनदेन 15 अगस्त 2024 को हुआ था। आरोपियों को मृतक से कभी पैसे नहीं मिले। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर मृतक को झूठा फंसाया गया था, तो उसने पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की और सह-अभियुक्तों को इतनी बड़ी रकम क्यों दी।
हाईकोर्ट ने कहा- आरोपियों की कोई सक्रिय भागीदारी नहीं मिली
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों ने न तो मृतक को उकसाया और न ही उनकी कोई सक्रिय भागीदारी सामने आई। कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी पैसों के लाभार्थी थे या उन्होंने सीधे पैसे लिए या मृतक को धमकी दी।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बताए गए तथ्यों और कानूनों के आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। मामले में अधिवक्ता अजय सिंह चौहान, अभय सिंह चौहान और प्रवीण पांडे ने निचली अदालत में पैरवी की थी।
सारणी सुसाइड केस: यह था पूरा मामला
भाजपा नेता रविंद्र देशमुख ने 7 अक्टूबर 2024 को कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। सारणी पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर दस लोगों को आरोपी बनाया था। नोट में आरोपियों पर मृतक को पैसों की मांग के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने की धमकी देने का आरोप था।
सुसाइड नोट में रंजीत सिंह, प्रकाश शिवहरे, दीपक शिवहरे, प्रमोद गुप्ता, अभिषेक साहू, मोहम्मद नसीम रजा, शमीम रजा, नाजिया बानो, करण सूर्यवंशी और भोला सिंह उर्फ रामनारायण सिंह का नाम था। बाद में पुलिस ने चार और लोगों को आरोपी बनाया।
एसपी निश्चल एन. झारिया ने मामले की जांच के लिए विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में पुलिस टीमें भेजी गईं और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी अंतरिम जमानत
वहीं सुसाइड केस में मुख्य आरोपी माने जाने वाले भाजपा नेता रंजीत सिंह, प्रकाश शिवहरे और करण को सुप्रीम कोर्ट से पहले अंतरिम जमानत मिली थी। यह जमानत उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर 21 जनवरी तक होने वाली सुनवाई तक के लिए दी गई थी। तीनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपए का मुचलका भरना पड़ा था।
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