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कोई दान की चीज नहीं हूं’-जब एक किसान की बेटी बनी IAS, जिसने ठुकरा दी कन्यादान की रस्म !

By,वामन पोटे

‘मैं कोई दान की चीज नहीं हूं’-जब एक किसान की बेटी बनी IAS, जिसने ठुकरा दी कन्यादान की रस्म !

एक किसान की बेटी जिसने दूसरी कोशिश में UPSC परीक्षा क्रैक करके AIR 23 रैंक हासिल की। उन्होंने अपनी शादी में ‘कन्यादान’ करने से मना कर दिया और अधिकारी रहते हुए एक मोटी रिश्वत को भी ठुकरा दिया।

जब भी कोई साधारण परिवार का बच्चा असाधारण सफलता हासिल करता है, तो वह सिर्फ अपने घर का ही नहीं, पूरे समाज का गौरव बन जाता है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है तपस्या परिहार की, जिन्होंने सीमित संसाधनों और सामाजिक बाधाओं के बावजूद UPSC जैसी कठिन परीक्षा में शानदार सफलता पाई। किसान परिवार की बेटी होकर भी उन्होंने कोचिंग के बिना अपने बलबूते AIR 23 हासिल की। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ शैक्षणिक सफलता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तिकरण और ईमानदारी का प्रतीक है। तपस्या की यात्रा हर उस युवा को राह दिखाती है जो अपने सपनों के लिए संघर्ष कर रहा है।

मध्य प्रदेश की धरती से निकली तपस्या परिहार की कहानी सिर्फ एक सफल UPSC कैंडिडेट की नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, संघर्ष, और ईमानदारी की मिसाल है। एक किसान परिवार की बेटी ने बिना कोचिंग, अपने दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC पास की और IAS बनीं। AIR 23 लाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
नरसिंहपुर की तपस्या ने केंद्रीय विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी की और फिर पुणे के इंडियन लॉ सोसाइटी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। पहले प्रयास में UPSC की प्रारंभिक परीक्षा में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कोचिंग छोड़कर खुद से तैयारी शुरू की, मॉक टेस्ट और करेंट अफेयर्स पर ध्यान दिया, और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं। नतीजा-दूसरे प्रयास में शानदार सफलता और IAS बनने का गौरव।

महिलाएं दान करने की चीज नहीं’
उनकी सफलता की दूसरी खास बात यह है कि उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को भी चुनौती दी। अपनी शादी में ‘कन्यादान’ की परंपरा को ठुकराते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि महिलाएं वस्तु नहीं हैं जिन्हें ‘दान’ किया जाए। यह साहसिक फैसला नारी सशक्तिकरण की ओर एक मजबूत कदम था।
रिश्वत ठुकरा कर कायम की ईमानदारी की मिसाल
तपस्या की ईमानदारी और प्रशासनिक निष्ठा भी लोगों को प्रेरित करती है। जब छतरपुर में जिला पंचायत CEO के पद पर कार्यरत थीं, तो एक निलंबित शिक्षक उन्हें 50,000 रुपये की रिश्वत देने आया। तपस्या ने न केवल रिश्वत लेने से इनकार कर दिया, बल्कि उस शिक्षक को पुलिस के हवाले कर दिया। इस कृत्य ने उन्हें ‘लेडी सिंघम’ की उपाधि दिलाई और उनकी ईमानदारी की मिसाल बन गई।

हजारों स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा की किरण
आज तपस्या परिहार उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो छोटे कस्बों से बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने सिखाया कि असफलता अंत नहीं होती, आत्मअनुशासन और सच्चाई की राह पर चलकर कोई भी ऊंचाई पाई जा सकती है। उनके जीवन की कहानी हर उस व्यक्ति के लिए रोशनी की किरण है जो कठिनाइयों से जूझते हुए सफलता की राह तलाश रहा है।

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