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निपटान पर ध्‍यान केन्द्रित करने संबंधी विशेष अभियान 4.0 की सराहना,फिर भी बैतूल नगर पालिका ने अभियान को लगाया पलीता 

By,वामन पोटे

निपटान पर ध्‍यान केन्द्रित करने संबंधी विशेष अभियान 4.0 की सराहना,फिर भी बैतूल नगर पालिका ने अभियान को लगाया पलीता 

कचरा नष्ट करने में निकली 17 हजार टन खाद, एक करोड़ में बिकती, निशुल्क दी

नवंबर 2024 में
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कार्यस्‍थलों, स्‍थान प्रबंधन, सर्वश्रेष्‍ठ कार्य व्‍यवहार को बढावा देने और लंबित मामलों के अधिकतम निपटान पर ध्‍यान केन्द्रित करने संबंधी विशेष अभियान 4.0 की सराहना की है।

बैतूल।।बैतूल ट्रेंचिंग ग्राउंड पर चार दशकों से जमा हो रहे लीगेसी वेस्टेज का 1 लाख 33 हजार टन कचरे में से निकली खाद को खराब क्वालिटी का बताकर नगरपालिका इसे निशुल्क बंटवा रही है। जबकि अब तक निकाले 86 हजार टन कचरे में से 20 प्रतिशत यानी 17 हजार टन खाद आसानी से बन सकती थी। वहीं कचरे से निकल रहे रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल का भी नपा उपयोग नहीं कर रही है। नपा के पास पहले ही राजस्व की कमी है, बजट के खजाने खाली हैं यदि इस खाद को बाजार में प्रोसेसिंग करके बेचा जाता तो आसानी से 66 लाख रुपए से 1 करोड़ रुपए तक की आमदनी नपा को हो सकती थी। लेकिन नगरपालिका इसे निशुल्क बंटवा रही है। कचरे को नष्ट किए जाने और खाद को अलग किए जाने के काम पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
8 एकड़ पर फैले ट्रेंचिंग ग्राउंड से 86 हजार टन कचरा नष्ट कर करने पर नपा ने 2 करोड़ का भुगतान ईकोस्टन कंपनी को कर दिया है। 5 करोड़ के इस भारी भरकम राशि वाले ठेके में बिना मॉनीटरिंग भुगतान किए जा रहे हैं, जबकि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर इंजीनियर झांकने तक नहीं जाते न ही कचरे को तोला जा रहा है। यहां से निकलने वाली खाद को बेचकर आसानी से 1 करोड़ रुपए तक का राजस्व नपा प्राप्त कर सकती थी। लेकिन नपा के अधिकारी अच्छी क्वालिटी नहीं होने की बात कह रहे हैं। जबकि प्रोसेसिंग के जरिए केमिकल डालकर आसानी से अच्छी क्वालिटी का खाद इसी कचरे से बनाया जा सकता है।
नपा के आंकड़ों की मानें तो इस प्रोजेक्ट का 65 प्रतिशत काम हो चुका है। यानी 1 लाख 33 हजार टन कचरे में से 86 हजार टन कचरा खोदकर बाहर निकाला जा चुका है। लेकिन अब भी ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे के 20 से 25 फीट ऊंचे पहाड़ लगे हुए हैं। कृषि विभाग के रिटायर्ड उपसंचालक बीएल दीक्षित ने बताया कि आमतौर पर जमीन में दबे कचरे से 20 प्रतिशत खाद बन जाती है। स्पष्ट है कि अधिकांश कचरे की प्रोसेसिंग ही नहीं हुई है। जमीन में से खोदकर निकाला कचरा भीगने और कीचड़ होने से बदबू और मक्खियों का अंबार लग रहा है। जिससे आसपास के लोग परेशान हैं, इन्हे अभी लंबे समय परेशान होना पड़ सकता है।
खाद थोड़ी उपजाऊ है कचरे से खाद पूरी तरह बनी नहीं है। इसके लिए केमिकल मिलाकर थोड़ी प्रोसेस करनी पड़ेगी। जांच में भी यह उपयोगी नहीं पाई गई थी। हालांकि यह थोड़ा उपजाऊ जरूर है, इसीलिए इस निकले मिट्टी और मलबे को कोई भी ले सकता है। इस संबंध में इसे जनहित में निशुल्क दिया जा रहा है। – सतीश मटसेनिया, सीएमओ, कचरे में से खाद नहीं बनी है। इसे नपा के अधिकारियों के निर्देश के अनुसार ही दिया जा रहा है। चूंकी खाद की क्वालिटी ठीक नहीं है, इसे बनने में काफी समय लगता है, इसीलिए इसका कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। – अभिषेक पांडे, मैनेजर, ईकोस्टन कंपनी, लेगेसी वेस्ट प्रोजेक्ट
।।साभार ।।

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