*सपा के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज नाथवानी पर सियासी घमासान: पिता NDA के साथ, बेटा INDIA के पाले में, अंबानी कनेक्शन से गरमाई यूपी की राजनीति*
By, वामन पोटे
*सपा के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज नाथवानी पर सियासी घमासान: पिता NDA के साथ, बेटा INDIA के पाले में, अंबानी कनेक्शन से गरमाई यूपी की राजनीति*
*लखनऊ/नई दिल्ली, 30 सितंबर ।* उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी को अपना उम्मीदवार बनाकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सरप्राइज दे दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में बुधवार को धनराज नाथवानी ने लखनऊ में अपना नामांकन दाखिल किया। उनके साथ प्रोफेसर रामगोपाल यादव और उनके पिता परिमल नाथवानी भी मौजूद थे।
इस एक नामांकन ने यूपी की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल इसलिए क्योंकि धनराज के पिता परिमल नाथवानी महज कुछ महीने पहले जून 2024 में झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चौथी बार राज्यसभा पहुंचे हैं। अब बेटा विपक्षी इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दल सपा के टिकट पर संसद जाने की तैयारी में है। पिता-पुत्र का एक साथ दो अलग-अलग ध्रुवों पर राज्यसभा में होना भारतीय संसदीय इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा है।
*कौन हैं धनराज परिमल नाथवानी?*
धनराज नाथवानी कोई सामान्य कारोबारी नहीं हैं। वह देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। उन्हें मुकेश अंबानी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। कॉर्पोरेट जगत में उनकी गिनती स्ट्रेटेजिक लीडर के तौर पर होती है।
वे रिलायंस कॉरपोरेट आईटी पार्क लिमिटेड के बोर्ड सदस्य हैं। गुजरात में जामनगर मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन और रिलायंस जियो के स्ट्रेटेजिक कारोबार की देखरेख वही करते हैं। इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ रिलायंस जियो डिफेंस सिस्टम लिमिटेड की गतिविधियां भी उनके अधीन हैं।
कारोबार के अलावा खेल प्रशासन में भी उनकी बड़ी भूमिका है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के अध्यक्ष हैं। इसी एसोसिएशन के अधीन अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम आता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। इस पद पर वह 2022 में निर्विरोध चुने गए थे और उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जगह ली थी।
धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों से भी उनका गहरा जुड़ाव है। वे द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष, गुजरात स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ के सदस्य, नाथद्वारा टेंपल बोर्ड के सदस्य और पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य हैं।
*पिता परिमल नाथवानी की कहानी: PCO से संसद तक*
धनराज के पिता परिमल नाथवानी की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है। 70 साल के परिमल नाथवानी आज रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉर्पोरेट अफेयर्स के डायरेक्टर हैं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन में कोल्डड्रिंक और साबुन की फैक्ट्री से लेकर वडोदरा में 40 से ज्यादा PCO चलाने तक का सफर तय किया है। एक समय शेयर बाजार में भारी नुकसान के बाद वह तनाव में भी रहे।
1997 में उनकी मुलाकात धीरूभाई अंबानी से हुई, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के लिए भूमि अधिग्रहण का जिम्मा नाथवानी को मिला, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। इसके बाद वह धीरूभाई अंबानी और फिर मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल हो गए। जियो नेटवर्क के विस्तार में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। वे वडोदरा स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और गुजरात फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।
*नामांकन के बाद क्या बोले धनराज?*
नामांकन के बाद धनराज नाथवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए मुझे समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने पर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी का हृदय से आभार और धन्यवाद करता हूं। सार्वजनिक जीवन के इस नए पड़ाव की ओर आज लखनऊ में माननीय अखिलेश यादव जी की उपस्थिति में राज्यसभा के लिए मैंने अपना नामांकन दाखिल किया।”
*सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?*
धनराज के नामांकन के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की बहस छिड़ गई है। पहली बहस उनके उत्तर प्रदेश कनेक्शन को लेकर है। आलोचक कह रहे हैं कि नाथवानी का यूपी से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है, वह मूलतः गुजरात और मुंबई के कारोबारी हैं। ऐसे में सपा ने उन्हें क्यों चुना?
दूसरी और बड़ी बहस उनके अंबानी कनेक्शन और राजनीतिक विचारधारा को लेकर है। पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा, “अखिलेश यादव ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। इससे नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा शुरू हो गई है। राहुल गांधी ने ‘मोदी के मददगारों’ की सूची से मुकेश अंबानी की तस्वीर भी हटा दी है।”
पत्रकार पीयूष राय ने लिखा, “वह वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उन्हें अंबानी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जगह जीसीए अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी।”
सोशल मीडिया यूजर अभिनंद मिश्रा ने तंज कसा, “सपा और बीजेपी राजनीतिक रूप से भले ही अलग-अलग ध्रुवों पर हों, लेकिन पैसा राजनीतिक मतभेदों को पाट देता है। अगर मैं गलत नहीं हूं, तो यह पहली बार होगा जब पिता और बेटा एक ही समय में राज्यसभा के सदस्य होंगे।”
यूजर अमित कुमार सिंधी ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “राहुल गांधी ने पहले अपने कार्यक्रम से मुकेश अंबानी का पोस्टर हटाया, फिर अखिलेश यादव के जरिए रिलायंस बोर्ड के डायरेक्टर के बेटे को टिकट दिलाया। मोदी जी का विपक्ष पर अडानी-अंबानी से पैसा लेने वाला वीडियो आज भी प्रासंगिक है।”
*सपा का दांव क्या है?*
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अखिलेश यादव का यह दांव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का एक बड़ा स्ट्रेटेजिक मूव है। सपा नेता एसटी हसन ने इस सरप्राइज पर एएनआई से कहा, “आप देखेंगे कि सरप्राइज होने वाले हैं। अब भी होने वाले हैं और आगे 2027 में भी होने वाले हैं। हम उन्हें (धनराज नाथवानी) एनडीए से तोड़ कर ले आए हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या सपा और बीजेपी में पर्दे के पीछे तालमेल है, तो उन्होंने कहा, “सपा और बीजेपी के बीच कभी अलायंस नहीं हो सकता। ना ही पर्दे के पीछे कोई तालमेल करते हैं। अगर हम बीजेपी को तोड़ेंगे तो ये बहुत बड़ा अचीवमेंट है।”
सूत्रों के अनुसार सपा को उम्मीद है कि धनराज नाथवानी के जरिए पार्टी को कॉर्पोरेट फंडिंग के साथ-साथ गुजराती और व्यापारी वर्ग में पैठ मिल सकती है, जो परंपरागत रूप से बीजेपी का वोट बैंक माना जाता है।
*राज्यसभा का गणित*
चुनाव आयोग ने 11 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव की अधिसूचना जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की 1 सीट शामिल है। इनमें बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, सपा नेता रामगोपाल यादव, बसपा के रामजी और 6 अन्य नेताओं का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। नामांकन 1 अक्टूबर से शुरू हो गया है और मतदान 16 अक्टूबर को होगा।
विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से बीजेपी गठबंधन को 8 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिलने की उम्मीद है। सपा के एमएलसी राजेंद्र चौधरी ने संकेत दिया है कि पार्टी एक तीसरे उम्मीदवार को भी मैदान में उतार सकती है। उन्होंने कहा, “हम तीसरे कैंडिडेट का नाम जल्द ही घोषित करेंगे।” ऐसे में मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर धनराज नाथवानी का नामांकन सिर्फ एक राज्यसभा उम्मीदवारी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में कारोबार, क्रिकेट और सत्ता के गठजोड़ की नई कहानी की शुरुआत माना जा रहा है।