15 अक्टूबर से UPI के बड़े भुगतानों पर बदलेगा नियम, बैतूल में वायरल दावे से दुकानदारों और ग्राहकों में बढ़ी चर्चा
By, वामन पोटे
15 अक्टूबर से UPI के बड़े भुगतानों पर बदलेगा नियम, बैतूल में वायरल दावे से दुकानदारों और ग्राहकों में बढ़ी चर्चा
बैतूल, 24 सितंबर ।। यूपीआई भुगतान को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों ने बैतूल समेत मध्यप्रदेश में नई बहस छेड़ दी है। ‘यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा’ जैसे संदेशों के साथ यह दावा किया जा रहा है कि 15 अक्टूबर से हर बार यूपीआई से पैसा भेजने पर 0.4 प्रतिशत राशि कटेगी और इससे छोटे दुकानदारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था की वास्तविकता वायरल संदेश में किए गए दावों से अलग है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पर लागू नहीं होगा, बल्कि निर्धारित सीमा से ऊपर के पात्र व्यापारी भुगतानों पर लागू होगा। �
Reuters
नई व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ऐसे लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति यानी एक बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में किए जाने वाले यूपीआई हस्तांतरण पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी छूट का प्रावधान रखा गया है। �
The Times of India +1
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एमडीआर ग्राहक से सीधे वसूल किया जाने वाला यूपीआई शुल्क नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका भुगतान व्यापारी-पक्ष पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होगा और बैंकों तथा भुगतान सेवा प्रदाताओं को इसे ग्राहक पर डालने से रोकने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार 15 अक्टूबर से इस बात की निगरानी भी करेगी कि व्यापारी ग्राहकों से यूपीआई शुल्क के नाम पर अतिरिक्त राशि न वसूलें। �
Jansatta
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में ₹10 हजार की राशि का उदाहरण देकर बताया जा रहा है कि यदि 0.4 प्रतिशत एमडीआर हर बार पैसा आगे भेजने पर लगे तो दस बार में राशि घटकर करीब ₹9,607 और 100 बार में करीब ₹6,951 रह जाएगी। पोस्ट आगे दावा करती है कि सैकड़ों बार राशि के घूमने पर लगभग पूरा पैसा शुल्क में चला जाएगा। यह गणित व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होता। इसलिए ₹10 हजार को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति और फिर तीसरे व्यक्ति को भेजने पर हर बार 0.4 प्रतिशत कटने का दावा मौजूदा प्रस्तावित व्यवस्था को सही तरीके से नहीं दर्शाता।
Reuters
हालांकि, व्यापारियों की चिंता पूरी तरह काल्पनिक नहीं है। बड़े व्यापारी भुगतानों पर एमडीआर लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ने का मुद्दा व्यापारी संगठनों ने उठाया है। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पंप संचालकों ने ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने की घोषणा की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राज्य के करीब 4,700 पेट्रोल पंपों से जुड़ा यह फैसला 15 अक्टूबर से लागू करने की बात कही गई है। संचालकों का कहना है कि ईंधन कारोबार में लाभ का अंतर सीमित है और अतिरिक्त शुल्क उनके लिए लागत बढ़ाएगा।
Hindustan Times +1
पेट्रोलियम कारोबारियों के इस फैसले का असर बैतूल जैसे जिलों में भी दिखाई दे सकता है, जहां ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में यूपीआई का इस्तेमाल रोजमर्रा की खरीदारी के साथ-साथ ईंधन, परिवहन और अन्य भुगतानों में व्यापक रूप से होता है। खासकर अधिक राशि के भुगतान में यदि कोई व्यापारी यूपीआई के बजाय नकद या कार्ड को प्राथमिकता देता है तो ग्राहकों को वैकल्पिक भुगतान माध्यम अपनाना पड़ सकता है।
वायरल संदेश का दूसरा प्रमुख दावा यह है कि एमडीआर लागू होने के बाद हर छोटे दुकानदार को नुकसान होगा और अंततः वस्तुओं की कीमत बढ़ेगी। फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। वास्तविक प्रभाव व्यापारी की श्रेणी, लेनदेन की राशि और संबंधित भुगतान की एमडीआर श्रेणी पर निर्भर करेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान और बड़ी संख्या में छोटे लेनदेन इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रहेंगे।
The Times of India
ऐसे में बैतूल में सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों को समझते समय दो बातों में अंतर करना जरूरी है—एक, बड़े पात्र व्यापारी भुगतानों पर एमडीआर का प्रस्ताव और दूसरा, हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगने का दावा। दोनों एक ही बात नहीं हैं। 15 अक्टूबर से नियम में बदलाव जरूर प्रस्तावित है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यूपीआई सेवा पूरी तरह बंद होगी या प्रत्येक डिजिटल भुगतान पर 0.4 प्रतिशत राशि कटेगी।